

Iran Russia Joint Drill: मध्य-पूर्व में युद्ध की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब उस मोड़ पर आ गया है जहां से वापसी का रास्ता कठिन नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम के जवाब में ईरान ने झुकने के बजाय अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ईरान ने रूस के साथ मिलकर हिंद महासागर और ओमान की खाड़ी में एक 'ज्वाइंट ड्रिल' शुरू की है जिसे ट्रंप की धमकियों का सीधा और प्रलयकारी जवाब माना जा रहा है।
ईरानी सेना की वेबसाइट और न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, इस सैन्य अभ्यास में ईरान की नौसेना और रूस की स्पेशल ऑपरेशन टीमें मिलकर काम कर रही हैं। ईरान ने इस अभ्यास के लिए अपना शक्तिशाली 'अलवंद डिस्ट्रॉयर' उतारा है। ड्रिल के दौरान मिसाइल लॉन्च करने वाले वॉरशिप, हेलीकॉप्टर, लैंडिंग क्राफ्ट और कॉम्बैट स्पीडबोट का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि दोनों देशों की सेनाओं ने एक हाईजैक किए गए जहाज को छुड़ाने का सफल ऑपरेशन करके अपनी तैयारी का लोहा मनवाया। यह युद्धाभ्यास होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र के पास हो रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है।
तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के पास परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए केवल 10 से 15 दिन हैं। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि यदि समय सीमा खत्म हुई, तो बहुत बुरी चीजें होंगी। ट्रंप के इस अल्टीमेटम के तुरंत बाद ईरान ने रूस के साथ अपनी सैन्य ड्रिल तेज कर दी।
अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई में अपनी सैन्य मौजूदगी को घातक बना दिया है। दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेरार्ड आर. फोर्ड को मिडिल ईस्ट में तैनात कर दिया गया है। इसके साथ ही 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर पहले से ही मोर्चा संभाले हुए हैं।
सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि यदि परमाणु वार्ता विफल होती है तो अगले कुछ हफ्तों के भीतर हमले की 90 प्रतिशत संभावना है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों और लीडरशिप को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। वर्तमान में रूस और चीन का समर्थन ईरान को इस संकट में मजबूती प्रदान कर रहा है।