7 दिन से 20 साल तक CM की कुर्सी... बिहार मतलब नीतीश कुमार, यहां देखिए पूरी टाइमलाइन

Nitish Kumar: नीतीश कुमार आज 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जो गठबंधन की राजनीति में उनकी लंबी और उतार-चढ़ाव भरी यात्रा को दर्शाता है, जिसने उन्हें 'सुशासन बाबू' की पहचान दी।
Nitish Kumar
नीतीश कुमार (सोर्स- सोशल मीडिया)
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How and When Nitish Kumar Take Oath as CM: बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक ऐसा नाम है जो पिछले दो दशकों से राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहा है। उन्हें प्यार से 'सुशासन बाबू' कहा जाता है, लेकिन उनके राजनीतिक सफर में गठबंधन बदलने के कई मोड़ आए हैं। आज, गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। उनका यह सफर मात्र 7 दिन के कार्यकाल से शुरू होकर अब 20 साल के रिकॉर्ड तक पहुंच चुका है।

नीतीश कुमार ने गठबंधनों की राजनीति में 10वीं बार की शपथ

बिहार के राजनीतिक इतिहास में नीतीश कुमार का नाम सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नेता के तौर पर दर्ज हो चुका है। आज गुरुवार को 11:30 बजे, वह पटना के गांधी मैदान में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। उनके साथ बीजेपी के सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन गठबंधनों की उलटफेर से भरा रहा है। उन्होंने कभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ सरकार बनाई तो कभी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) वाले महागठबंधन के साथ। उनकी यह यात्रा साल 2000 में शुरू हुई थी।

मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के मुख्य कार्यकाल

नीतीश कुमार को बिहार की कमान पहली बार 2000 में मिली थी, लेकिन यह कार्यकाल केवल 7 दिनों का रहा। बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

  1. 2000 में पहली बार: 3 मार्च 2000 को सीएम बने, पर बहुमत न होने से 7 दिन में इस्तीफा।
  2. 2005 में असली शुरुआत: नवंबर 2005 में एनडीए के साथ प्रचंड जीत के बाद उन्होंने अपना पहला पूरा 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। यहीं से उन्हें 'सुशासन बाबू' की पहचान मिली।
  3. 2010 में जबरदस्त वापसी: 2010 के चुनाव में भी एनडीए की जीत हुई और नीतीश ने फिर शपथ ली। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के कारण उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।
  4. 2015 में महागठबंधन का नेतृत्व: अपने इस्तीफे के बाद जीतन राम मांझी को सीएम बनाया, लेकिन फरवरी 2015 में वह खुद वापस सीएम बन गए। नवंबर 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी और जेडीयू के महागठबंधन को बड़ी जीत मिली और नीतीश सीएम बने।
  5. 2017 में एनडीए में वापसी: आरजेडी से मनमुटाव होने पर उन्होंने जुलाई 2017 में महागठबंधन छोड़ा और तुरंत एनडीए में वापस आकर छठी बार मुख्यमंत्री बने।
  6. 2020 में खराब प्रदर्शन के बावजूद: 2020 विधानसभा चुनाव में जेडीयू का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, फिर भी एनडीए में बहुमत होने के कारण वह सातवीं बार सीएम बने।
  7. 2022 में फिर महागठबंधन: अगस्त 2022 में उन्होंने एक बार फिर पाला बदला, एनडीए छोड़कर महागठबंधन में लौटे और आठवीं बार सीएम बने।
  8. 2024 में एनडीए में 9वीं शपथ: हाल ही में, 2024 में आरजेडी से मनमुटाव के बाद उन्होंने महागठबंधन छोड़ा और फिर से एनडीए में शामिल होकर नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

आज, जब वह 10वीं बार शपथ ले रहे हैं तो यह बात स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में गठबंधन का पहिया उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमता रहा है।

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