होर्मुज स्ट्रेट में शिप पर ईरान का ड्रोन हमला (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

Hormuz Strait Iran Attack: ईरान के ड्रोन हमले के बाद होर्मुज में UN ने रोका रेस्क्यू अभियान

Hormuz Strait Iran Attack: होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के ड्रोन हमले के बाद UN ने रेस्क्यू अभियान रोक दिया है। इस फैसले से 11000 नाविकों की जान खतरे में है जो अभी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं।

प्रिया सिंह

Hormuz Strait Iran Attack Cargo Ship News: होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले के बाद एक बार फिर समुद्री तनाव बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है। ओमान के तट के पास एक कार्गो शिप पर हुए भयानक हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी आईएमओ ने रेस्क्यू अभियान को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इस अहम और बड़े फैसले से उन करीब 11000 नाविकों की सुरक्षा पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है जो अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हैं और बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं।

पिछले कुछ दिनों से संयुक्त राष्ट्र और ओमान की मदद से फारस की खाड़ी में फंसे इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का बड़ा अभियान चल रहा था। इस मिशन का मुख्य मकसद उन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार कराना था जो युद्ध और सुरक्षा प्रतिबंधों की वजह से कई दिनों से फंसे हुए थे। इसी दौरान ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो शिप एवर लवली पर ड्रोन हमला हो गया जिससे इस रेस्क्यू को रोक दिया गया है।

नाविकों की जान पर भारी खतरा

आईएमओ के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक इवैक्युएशन लिस्ट में शामिल जहाजों की सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती तब तक अभियान आगे नहीं बढ़ेगा। आईएमओ के मुताबिक इस पूरे इलाके में करीब 20000 से ज्यादा नाविक अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं। इनमें से लगभग 11000 नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए यह विशेष इवैक्युएशन प्लान पूरी तरह तैयार किया गया था। अब अभियान रुकने से ये नाविक फिर से बीच समंदर में बहुत बुरी तरह फंस गए हैं।

ईरान की बहुत सख्त चेतावनी

ईरान ने कुछ दिन पहले ही कड़ी चेतावनी दी थी कि उसकी इजाजत के बिना कोई भी जहाज संयुक्त राष्ट्र और ओमान द्वारा तैयार किए गए नए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल बिल्कुल न करे। ड्रोन हमले के कुछ घंटों बाद ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने एक बहुत ही सख्त बयान जारी किया है। जो जहाज ईरान द्वारा तय किए गए आधिकारिक रास्ते के बजाय दूसरे मार्ग का इस्तेमाल करेंगे उनकी सुरक्षा की कोई भी गारंटी नहीं होगी और नुकसान की पूरी जिम्मेदारी जहाज मालिक की होगी।

दो अलग-अलग समुद्री मार्ग

इस समय होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने के लिए दो अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर मौजूद हैं जिन पर बहुत बड़ा विवाद है। पहला रास्ता ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है जहां जहाजों को पीजीएसए से सबसे पहले इजाजत लेनी होती है। दूसरा रास्ता ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है जिसका इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र रेस्क्यू के लिए कर रहा था। 24 जून को ही 60 से ज्यादा विमानों को पार कराया गया था लेकिन ईरान का कहना है कि सिर्फ लारक आईलैंड के पास से गुजरना होगा।

दुनियाभर की ऊर्जा आपूर्ति पर असर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम और बड़ा ऊर्जा कॉरिडोर माना जाता है जहां से अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है। दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी सप्लाई इसी अहम रास्ते से होती है। भारत, चीन और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा जरूरतें पूरी तरह से इसी समुद्री मार्ग पर ही निर्भर हैं। अगर जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं निकला तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई और कीमतें बहुत बुरी तरह से प्रभावित होंगी।

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