UPI चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तत्काल रोक से इनकार, केंद्र-NPCI को नोटिस

UPI MDR Charges: सुप्रीम कोर्ट ने UPI पर MDR चार्ज के खिलाफ याचिका पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया। कोर्ट ने केंद्र, NPCI और संबंधित पक्षों से चार हफ्ते में जवाब मांगा।
Supreme Court on UPI MDR Charges
UPI MDR चार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Supreme Court on UPI MDR Charges: सुप्रीम कोर्ट ने आज ऑनलाइन (UPI) लेनदेन में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लगाए जाने के मामले में सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने MDR चार्ज पर फिलहाल तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, UPI स्टीयरिंग कमेटी, NPCI समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।

मामले की सुनवाई सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। बेंच ने आज सुनवाई के दौरान सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट में 2000 रुपए से अधिक के UPI भुगतानों पर लागू किए गए नए शुल्क के आदेश को चुनौती दी गई है। 

क्या है MDR चार्ज?

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने हाल ही में घोषणा की थी कि 15 अक्टूबर से UPI के जरिए होने 2,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतानों पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट चार्ज लागू होगा। ऐसे भुगतानों के लिए MDR की दर 0.4 प्रतिशत तय की गई है। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित की गई है।

हालांकि, इस नई व्यवस्था का सीधा असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। यह चार्ज दुकानदारों या व्यापारियों से लिया जाएगा। सरकार के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत व्यापारी भुगतान इस बदलाव के दायरे से बाहर रहेंगे।

छोटे दुकानदारों को भी मिलेगी राहत

नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों को भी MDR चार्ज से राहत दी गई है। UPI QR के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों से कोई MDR शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए 5 रुपये का निश्चित चार्ज तय किया गया है।

MDR के खिलाफ याचिका में क्या कहा गया?  

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI व्यापारी भुगतानों पर MDR लगाने का फैसला पर्याप्त कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लिया गया। याचिका के जरिए केंद्र के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत जनवरी 2020 से लागू शून्य-शुल्क व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने MDR चार्ज पर क्या कहा? 

सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इसका मतलब है कि फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई MDR व्यवस्था पर अदालत की ओर से कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है।

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