Highlights:
लखनऊ में टारगेट किलिंग की साजिश नाकाम
यूपी ATS ने तीन आरोपियों को दबोचा
बाल अपचारी भी हिरासत में
UP ATS Shahzad Bhatti Network: उत्तर प्रदेश में आतंकी साजिश को अंजाम देने की कोशिश को यूपी एटीएस ने नाकाम कर दिया है। प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक बाल अपचारी को पुलिस निगरानी में लिया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर लखनऊ में किसी पुलिसकर्मी या सेना के जवान की हत्या करने की तैयारी में थे।
एटीएस ने आरोपियों के पास से एक विदेशी पिस्टल और 20 विदेशी कारतूस बरामद किए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपियों को वारदात के बाद उसका वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर को भेजना था। इसके बदले उन्हें तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में आरोपियों के पाकिस्तानी हैंडलर राना भाई से इंटरनेट मीडिया के जरिए संपर्क में होने की जानकारी मिली है। हैंडलर के निर्देश पर आरोपी 27 अक्टूबर को अमृतसर से दिल्ली के रास्ते रवाना हुए और 29 अक्टूबर की रात लखनऊ पहुंचे।
लखनऊ आने के बाद आरोपियों ने रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाया और उसे अपने पाकिस्तानी हैंडलर को भेजा। एटीएस को शक है कि आरोपियों ने शहर के दूसरे संवेदनशील स्थानों की भी जानकारी जुटाई हो सकती है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने किन जगहों की रेकी की और वहां से जुटाई गई जानकारी किस तरह पाकिस्तान तक पहुंचाई गई।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को लखनऊ में हथियार उपलब्ध कराने के लिए एक स्थानीय सहयोगी सक्रिय था। हैंडलर की ओर से पहले ही हथियार भेजे जाने की बात कही गई थी। लखनऊ पहुंचने पर स्थानीय संपर्क के जरिए उन्हें पिस्टल और कारतूस दिए गए। शहर आने-जाने के किराये और अन्य खर्चों के लिए भी आरोपियों को पैसे भेजे गए थे।
आरोपियों ने वारदात के बाद नेपाल भागने की योजना भी बनाई थी, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें। हालांकि, इससे पहले ही एटीएस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
जांच के दौरान यूपी एटीएस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई अहम सुराग मिले हैं। शुरुआती जांच में वर्चुअल नंबरों के जरिए चलाए जा रहे वाट्सएप अकाउंट से विदेशी नंबरों पर बातचीत के प्रमाण मिले हैं। मोबाइल में संदिग्ध चैट, वीडियो और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी से जुड़ी सामग्री भी मिली है।
फिलहाल एटीएस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच का दायरा हथियारों की सप्लाई करने वालों, स्थानीय मददगारों, आर्थिक लेन-देन और साजिश में शामिल अन्य लोगों तक बढ़ाया गया है।
रिपोर्ट- ईशांक दीक्षित