

समालखा निरंकारी संत समागम में नागपुर के श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा।
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने ब्रह्मज्ञान और मानवता का संदेश दिया।
सभी भक्त समागम से प्रेम और निस्वार्थ सेवा का संकल्प लौटे।
Samalkha Nirankari Sant Samagam 2026 Nagpur Devotees: हरियाणा स्थित समालखा निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में संतरानगरी नागपुर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं तथा सेवादारों के जत्थे ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस भव्य आध्यात्मिक समागम में नागपुर तथा संपूर्ण महाराष्ट्र से पहुंचे हजारों भक्तों ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त किया।
समागम के समापन के उपरांत नागपुर के श्रद्धालु अब ब्रह्मज्ञान, प्रेम, निस्वार्थ सेवा और मानवता का अलौकिक संदेश लेकर अपने गृह नगर लौट आए हैं।
निरंकारी संत समागम के दौरान आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हुए निरंकारी मिशन की प्रमुख सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि जब हृदय में प्रेमाभक्ति का दिव्य प्रकाश जागृत होता है, तब जीवन का प्रत्येक भाव, समर्पण तथा मानवता की अलौकिक अनुभूति से महक उठता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रह्मज्ञान जागृति का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि इसकी शुरुआत है।
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्ची जागृति वही है, जब मनुष्य अपने जीवन के प्रत्येक पल में निरंकार के अहसास के साथ प्रेम, विश्वास और विनम्रता से जीवन व्यतीत करे।
उन्होंने कहा कि केवल सत्संग में उपस्थित होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां से प्राप्त शिक्षाओं को अपने व्यवहार में अपनाना आवश्यक है। सेवा और समर्पण किसी भी प्रकार के दिखावे के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि वह सच्चे भावों से युक्त होना चाहिए।
समालखा में संपन्न हुए इस विशाल आयोजन से लौटे नागपुर के श्रद्धालुओं ने बताया कि समागम परिसर में विभिन्न संस्कृतियों, विविध पृष्ठभूमि और विभिन्न भाषाओं के लोग एक साथ मिलकर प्रेम, शांति तथा भाईचारे का सुंदर वातावरण प्रस्तुत कर रहे थे।
नागपुर शहर के सेवादारों ने भी समागम की व्यवस्थाओं में अपना निस्वार्थ योगदान दिया और अब वे इस पावन संदेश को समाज में प्रसारित करने के संकल्प के साथ अपने गृह नगर नागपुर वापस लौटे हैं।