Kailash Vijayvargiya Water Crisis Meeting : अल्पवर्षा के बीच इंदौर में गहराते जलसंकट से निपटने के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अगुवाई में हुई बैठक अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। शहर के सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों को बैठक में आमंत्रित किया गया था, लेकिन भाजपा के केवल तीन विधायक ही इसमें पहुंचे। जलसंकट जैसे अहम मुद्दे पर विधायकों की कम मौजूदगी के बाद पार्टी के भीतर तालमेल और कथित गुटबाजी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इंदौर में पानी की समस्या से निपटने के लिए बुलाई गई बैठक में शहर के सभी विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को शामिल होना था। हालांकि, भाजपा के केवल तीन विधायकों की मौजूदगी सामने आई। विधायकों की गैरमौजूदगी के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा होने लगी कि क्या पार्टी के जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी है। हालांकि, बैठक में कम उपस्थिति के पीछे किसी राजनीतिक वजह की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बैठक में विधायकों के नहीं पहुंचने को लेकर सवाल किए जाने पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जिन विधायकों के क्षेत्रों में पानी की समस्या नहीं होगी, वे बैठक में नहीं आए। उनके इस बयान के बाद भी विधायकों की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चा जारी है। सवाल उठ रहा है कि जब शहर में जलसंकट से निपटने के लिए साझा रणनीति बनाई जा रही थी, तब सभी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी क्यों नहीं दिखी।
इस बैठक का समय भी चर्चा में है। जिस दिन इंदौर में जलसंकट पर रणनीति बनाने के लिए बैठक हुई, उसी दिन भोपाल में प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक भी आयोजित थी। कैलाश विजयवर्गीय ने भोपाल की कैबिनेट बैठक के बजाय इंदौर में जलसंकट को लेकर चर्चा की। दूसरी ओर, भाजपा के कई विधायकों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं।
विधायकों की कम मौजूदगी को पार्टी के भीतर कथित मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में कैलाश विजयवर्गीय और कुछ विधायकों के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चाएं हैं।
बैठक में जलसंकट से निपटने के लिए मध्य प्रदेश शासन से 50 करोड़ रुपये की मांग करने सहित कई विकल्पों पर चर्चा हुई। नए बोरिंग की अनुमति पर रोक लगाने की संभावना और जरूरत पड़ने पर निजी बोरिंग से जलापूर्ति जैसे उपाय भी चर्चा में रहे। इसके साथ ही पानी की बर्बादी रोकने और नल में सीधे मोटर लगाकर पानी खींचने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर भी जोर दिया गया।
जलापूर्ति बेहतर करने के लिए बिलावली तालाब और यशवंत सागर में नर्मदा का पानी पहुंचाने की योजना पर भी चर्चा हुई। जरूरत के मुताबिक टैंकरों की व्यवस्था करने और ट्रीटेड वॉटर के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे विकल्पों पर विचार किया गया। बैठक में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ उसकी बर्बादी रोकने पर भी जोर रहा।
इंदौर में कम बारिश के बीच जलसंकट से निपटना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में बैठक में सभी विधायकों की भागीदारी से साझा रणनीति को मजबूती मिल सकती थी। लेकिन भाजपा के केवल तीन विधायकों के पहुंचने से राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि जलसंकट के समाधान के लिए आगे होने वाली बैठकों में जनप्रतिनिधियों के बीच कितना तालमेल दिखाई देता है।