

मुंबई पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी को 17 अक्टूबर को आजाद मैदान में प्रदर्शन की मंजूरी दी।
पुलिस प्रशासन के अनुसार शहर में सभी प्रकार के विरोध प्रदर्शनों के लिए आजाद मैदान ही निर्धारित स्थल है।
CJP का यह तिरंगा मार्च मुख्य रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए है।
CJP Protest Mumbai Police: मायानगरी मुंबई में राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी को 17 अक्टूबर को मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन और तिरंगा मार्च आयोजित करने की आधिकारिक अनुमति मुंबई पुलिस से मिल गई है।
मुंबई पुलिस प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि आजाद मैदान शहर में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक सभाओं के लिए निर्धारित अधिकृत स्थल है, इसलिए कानून-व्यवस्था के स्थापित नियमों के दायरे में रहते हुए इस आयोजन की मंजूरी दी गई है।
कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित किए जा रहे इस बहुचर्चित प्रदर्शन का मुख्य एजेंडा भारत के CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना है। CJP के सेंट्रल मुंबई समन्वयक के अनुसार, 17 अक्टूबर को होने वाले इस 'तिरंगा मार्च' और विरोध सभा के जरिए वे राष्ट्रीय स्तर के चुनावी मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। संगठन का दावा है कि इस प्रदर्शन के लिए मुंबई और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तथा समर्थक आजाद मैदान में एकत्र होंगे।
राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर के विरोध प्रदर्शनों और जन-आंदोलनों का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है। हालांकि, जिस प्रकार मुंबई में केंद्रीय स्तर की मांगों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है, उससे राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या मुंबई का आजाद मैदान भी विरोध प्रदर्शनों का नया जंतर-मंतर बनने जा रहा है? इससे पहले भी CJP द्वारा मुंबई के शिवाजी पार्क और अगस्त क्रांति मैदान में प्रदर्शन आयोजित किए जा चुके हैं।
मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों को आजाद मैदान के निर्धारित परिसर के भीतर ही शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की इजाजत दी गई है। सुरक्षा के लिहाज से आजाद मैदान और दक्षिण मुंबई के प्रमुख मार्गों पर पुलिस प्रशासन नजर रखेगा, ताकि आम नागरिकों और यातायात व्यवस्था में कोई बाधा उत्पन्न न हो। अब राजनीतिक गलियारों और आम जनता की निगाहें 17 अक्टूबर को आजाद मैदान में होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन पर टिकी हैं।