SIR के बाद अब SSR की तैयारी, यूपी समेत 17 राज्यों में वोटर लिस्ट होगी अपडेट; जानें दोनों में क्या है अंतर

SIR vs SSR: चुनाव आयोग 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR करेगा। यूपी, पंजाब समेत चुनावी राज्यों में मतदाता सूची अपडेट होगी। जानें SIR और SSR में अंतर और युवाओं के आवेदन के नियम।
Special Summary Revision
सांकेतिक तस्वीरSource- IANS
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Highlights

  • चुनाव आयोग 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) करेगा।

  • यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची अपडेट होगी।

  • SIR और SSR की प्रक्रिया अलग है। 2027 में 18 साल के होने वाले युवा भी निर्धारित पात्रता तिथियों के अनुसार आवेदन कर सकेंगे।

Special Summary Revision: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा की है। इस सूची में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर जैसे वे राज्य भी शामिल हैं, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। आयोग ने इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि माना जाएगा। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना और मौजूदा प्रविष्टियों में सुधार करना है।

आयोग के मुताबिक, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां SSR का कार्यक्रम उचित समय पर घोषित किया जाएगा। इसमें मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए भी कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।

किन राज्यों में होगा SSR?

आयोग की घोषणा के अनुसार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर सहित 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण किया जाएगा। इन राज्यों में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करना महत्वपूर्ण होगा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में समाप्त हो रहा है, जबकि गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। ऐसे में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और विवरण में सुधार की प्रक्रिया चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा है।

क्या है SSR?

SSR का पूरा नाम Special Summary Revision यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण है। यह मतदाता सूची को अपडेट करने की नियमित प्रक्रिया है। इसमें मौजूदा मतदाता सूची को आधार बनाकर नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, गलत प्रविष्टियों में सुधार किया जाता है और नियमानुसार अपात्र या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं।

इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता अपने नाम, पते और अन्य जानकारियों की जांच कर सकते हैं। नए मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं और सूची में दर्ज गलतियों को ठीक कराने के लिए भी आवेदन दिया जा सकता है।

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SSR में दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं। हालांकि, इसे केवल ऑनलाइन या बिना किसी क्षेत्रीय सत्यापन वाली प्रक्रिया मानना सही नहीं होगा। जरूरत के अनुसार निर्वाचन अधिकारी और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) प्रविष्टियों का सत्यापन कर सकते हैं।

क्या होता है SIR?

SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision यानी विशेष गहन पुनरीक्षण है। यह मतदाता सूची की अधिक व्यापक जांच और सत्यापन की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच की जाती है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें और मृत, स्थानांतरित या नियमानुसार अपात्र व्यक्तियों की प्रविष्टियों की पहचान की जा सके।

इस प्रक्रिया में मतदाताओं से निर्धारित दस्तावेज या जानकारी मांगी जा सकती है। पात्र नागरिकों को नाम शामिल कराने और गलतियों में सुधार के लिए आवेदन करने का अवसर भी मिलता है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा करना है।

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SSR और SIR में क्या अंतर है?

  • SSR: मौजूदा मतदाता सूची को आधार बनाकर उसमें नियमित अपडेट, सुधार और नए नाम जोड़ने पर जोर दिया जाता है।

  • SIR: मतदाता सूची की अधिक व्यापक और गहन जांच की जाती है।

  • दोनों में समानता: पात्र मतदाता नाम जुड़वाने और विवरण सुधारने के लिए आवेदन कर सकते हैं। नियमानुसार गलत या अपात्र प्रविष्टियों पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकती है।

इसलिए SSR और SIR को एक ही प्रक्रिया नहीं माना जाना चाहिए। दोनों का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, लेकिन इनके दायरे और सत्यापन की प्रक्रिया में अंतर होता है।

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