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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा थलपति विजय की 'जन नायकन' का सेंसर विवाद, मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती

Jana Nayagan: 'जन नायकन' का सेंसर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मद्रास हाईकोर्ट ने U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया था, जिसे CBFC ने चुनौती दी है। फिल्म 22 देशों में रिलीज होनी है।

अनिल सिंह

Jana Nayagan Supreme Court: साउथ सुपरस्टार थलपति विजय की मच अवेटेड फिल्म 'जन नायकन' लगातार कानूनी विवादों में घिरी हुई है। यह फिल्म उनके करियर का आखिरी बड़ा प्रोजेक्ट मानी जा रही है। रिलीज़ से ठीक पहले, फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर उठा यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है।

'जन नायकन' की रिलीज़ पहले ही कई बार टल चुकी है, और अब निर्माताओं को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है, क्योंकि मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।

मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती

पिछले सप्ताह, मद्रास हाईकोर्ट ने फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चेयरपर्सन का फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजने का अधिकार अवैध था।

हाईकोर्ट का तर्क: कोर्ट के मुताबिक, जब CBFC चेयरपर्सन ने सिफारिश की थी कि सर्टिफिकेट मामूली कट के बाद जारी किया जाएगा, तब उनका यह राइट खत्म हो गया था। इसके बाद निर्माताओं ने सर्टिफिकेट तुरंत जारी करने की मांग के साथ अदालत का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला: हालांकि, अब मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला उच्चतम न्यायालय में पहुँच गया है।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की दलील

उच्चतम न्यायालय में इस चुनौती के पीछे मुख्य दलील यह है कि किसी भी तरह के सर्टिफिकेट जारी करने या रोकने के फैसले पर रिव्यू (समीक्षा) की संभावना बनी रहनी चाहिए।

दलील: चुनौतीकर्ताओं का कहना है कि फिल्म को रिलीज़ करने से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करना ज़रूरी है।

अनिश्चितता: सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई के लिए तारीख तय नहीं की है, लेकिन इस कदम ने फिल्म के रिलीज़ को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

22 देशों में चार भाषाओं में रिलीज़ की योजना

'जन नायकन' को केवीएन प्रोडक्शंस ने निर्मित किया है और इसका निर्देशन एच. विनोथ ने किया है।

मुख्य भूमिकाएं: फिल्म में थलपति विजय के साथ पूजा हेगड़े और ममिता बैजू प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

विस्तृत रिलीज़: निर्माताओं ने बताया कि फिल्म को 22 देशों में चार भाषाओं में रिलीज़ करने की योजना है। इस फिल्म की एडवांस बुकिंग पहले ही शुरू हो चुकी थी, जिससे दर्शकों में इसके लिए उत्साह और मांग बहुत ज्यादा है।

विवाद की शुरुआत

फिल्म का सर्टिफिकेशन विवाद तब शुरू हुआ जब CBFC के एक सदस्य ने चेयरपर्सन को शिकायत भेजी कि फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने से पहले उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया।

अगला कदम: इसके बाद फिल्म रिवाइजिंग कमेटी के पास चली गई, जिससे रिलीज़ बार-बार टलती रही।

निर्माताओं की दलील: निर्माताओं ने कोर्ट में दलील दी थी कि सिर्फ एक सदस्य की शिकायत के आधार पर सर्टिफिकेट रोकना गलत और मनमाना है, खासकर जब फिल्म किसी तीसरे पक्ष को दिखाई नहीं गई है।

निर्माताओं का कहना है कि देरी से न केवल उनकी योजनाओं पर असर पड़ेगा, बल्कि दर्शकों की एक्साइटमेंट भी प्रभावित होगी। उनका मानना है कि मामूली सिफारिशों को पूरा कर लिया गया है, और अब इसे रिलीज़ करना ही उचित है।

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