ट्रंप का तालिबान को चौंकाने वाला तोहफा, 10 मिलियन डॉलर के इनामी सिराजुद्दीन हक्कानी और दो अन्य पर रहम

तालिबान ने दो सालों से कैद में बैठे अमेरिकी शख्स को पिछले हफ्ते रिहा कर दिया था। इसके बाद अब अमेरिकी सरकार ने भी तालिबान के तीन प्रमुख नेताओं से कई मिलियन डॉलर के भारी भरकम इनाम हटा लिया है।
world news Trump gives a surprising gift to Taliban mercy on Sirajuddin Haqqani and two others with $10 million bounty on their head
तालिबान के नेता हक्कानी व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका और तालिबान के रिश्तों में हाल ही में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने सभी को हैरान कर दिया। अमेरिका ने अचानक तीन प्रमुख तालिबान नेताओं — सिराजुद्दीन हक्कानी, अब्दुल अज़ीज़ हक्कानी और याह्या हक्कानी — पर लगे इनाम को हटा लिया है। यह वही सिराजुद्दीन हक्कानी हैं जिन्होंने 2008 में काबुल के सेरेना होटल पर हमले की योजना बनाई थी, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक अमेरिकी नागरिक थॉर डेविड हेसला भी शामिल थे। इतना ही नहीं, हक्कानी नेटवर्क भारत के काबुल स्थित दूतावास पर हुए बम धमाकों का भी जिम्मेदार रहा है।

अमेरिका के इस कदम के पीछे की रणनीति

काबुल में तालिबान सरकार के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सरकार ने अब इन तीनों नेताओं पर से इनाम हटा लिया है। अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन क़ानी ने बताया कि ये तीनों आपस में दो भाई और एक चचेरा भाई हैं। हक्कानी नेटवर्क लंबे समय से तालिबान का सबसे खूंखार और खतरनाक धड़ा माना जाता रहा है। इस नेटवर्क ने अफगानिस्तान में सड़कों पर बम धमाके, आत्मघाती हमले और बड़े सरकारी ठिकानों पर हमलों को अंजाम दिया है, जिसमें भारत और अमेरिका के दूतावास भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, ये नेटवर्क फिरौती के लिए अपहरण और दूसरे आपराधिक गतिविधियों से भी जुड़ा रहा है। विदेश की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

तालिबान-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़

इस घटनाक्रम को तालिबान और अमेरिका के बीच संबंधों के सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी जाकिर जलाली ने कहा कि अमेरिका द्वारा अमेरिकी नागरिक जॉर्ज ग्लेज़मैन को रिहा करवाने और हक्कानी नेताओं पर से इनाम हटाने जैसे कदम यह दिखाते हैं कि दोनों पक्ष अब युद्धकालीन तनाव को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। तालिबान अब इसे अपने वैश्विक अलगाव से बाहर निकलने का मौका मान रहा है। तालिबान के एक और अधिकारी शफी आज़म ने इसे रिश्तों के सामान्यीकरण की दिशा में अहम कदम बताया और यह भी बताया कि तालिबान ने अब नॉर्वे में अफगान दूतावास का नियंत्रण भी संभाल लिया है।

चीन अब तक तालिबान को अपने राजनयिक के रूप में मान्यता दे चुका है, और क़तर लंबे समय से अमेरिका और तालिबान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाता आ रहा है। अब सवाल यह है कि क्या यह कदम तालिबान और अमेरिका के रिश्तों को नई दिशा देगा या फिर यह एक अस्थायी रणनीति साबित होगी? दुनिया की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि अमेरिका का यह चौंकाने वाला फैसला आखिर कितनी दूर तक असर डालता है।

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