
बलूचिस्तान हिंसा ख्वाजा आसिफ का बयान, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Balochistan Voilence News In Hindi: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शनिवार को बलूचिस्तान के 12 शहरों में एक साथ हुए भीषण और समन्वित हमलों ने न सिर्फ पाकिस्तानी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि सेना की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन हमलों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रमुख सैन्य ठिकानों, पुलिस चौकियों और अर्धसैनिक बलों के अड्डों को निशाना बनाया गया।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को नेशनल असेंबली में स्वीकार किया कि बलूचिस्तान में सेना की विफलता का एक बड़ा कारण वहां की भौगोलिक स्थिति है। उन्होंने बताया कि बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल भूभाग का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है लेकिन यहां की आबादी बेहद कम है। आसिफ के मुताबिक, यहां औसतन 35 किलोमीटर के दायरे में सिर्फ एक व्यक्ति मिलता है, जिससे इतने विशाल और निर्जन इलाके को नियंत्रित करना सेना के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
रक्षा मंत्री ने संसद में एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि बलूचिस्तान में केवल अलगाववाद ही समस्या नहीं है बल्कि वहां कबीलाई नेताओं, अपराधियों और नौकरशाही का एक खतरनाक गठजोड़ काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेल स्मगलिंग से जुड़े आपराधिक गिरोह अलगाववादी संगठनों को फंडिंग और संरक्षण दे रहे हैं। ख्वाजा आसिफ के अनुसार, जो आंदोलन पहले राजनीतिक और राष्ट्रवादी था अब उसकी कमान अपराधियों और स्मगलरों के हाथ में चली गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में आतंकवाद को खाद-पानी तेल की तस्करी से मिल रहा है। रक्षा मंत्री ने बताया कि तेल स्मगलिंग के नेटवर्क से रोजाना करीब 4 अरब रुपये की कमाई हो रही है, जिसका इस्तेमाल हथियार खरीदने और आतंक फैलाने में किया जा रहा है। इसके अलावा, अफगानिस्तान से आने वाला ट्रांजिट माल भी अवैध रूप से पाकिस्तान में बेचा जा रहा है।
पिछले दो दिनों के आंकड़ों को साझा करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि सुरक्षा बलों ने 177 आतंकियों को मार गिराया है लेकिन इस संघर्ष में 16 जवान और 33 नागरिक भी मारे गए हैं।
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उन्होंने ‘मिसिंग पर्सन’ और मानवाधिकार के मुद्दों को केवल एक नैरेटिव करार दिया और दावा किया कि इस नेटवर्क के मुख्य लोग दुबई और मस्कट में ऐश कर रहे हैं जबकि बलूचिस्तान में हिंसा भड़का रहे हैं। इन हमलों में आत्मघाती हमलावरों के साथ महिला लड़ाकों का शामिल होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।






