ईरान ने USS गेराल्ड फोर्ड को दी चेतावनी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
USS Gerald Ford Iran Threat Red Sea Conflict: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से जारी इस युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाला है, बल्कि अब यह महायुद्ध की आहट दे रहा है। इसी बीच, ईरान ने लाल सागर में तैनात अमेरिकी नौसेना के सबसे उन्नत विमानवाहक पोत, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है।
ईरान के खतम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहीम जोलफाघारी ने स्पष्ट किया है कि लाल सागर में इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की उपस्थिति ईरान के लिए एक सीधा खतरा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि इस कैरियर को रसद और अन्य सेवाएं प्रदान करने वाले सभी केंद्रों को अब ईरानी सशस्त्र बलों का ‘वैध लक्ष्य’ माना जाएगा।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, जो भी बुनियादी ढांचा इस पोत के संचालन में सहयोग करेगा, उसे उनके सैन्य परिचालन नेटवर्क का हिस्सा माना जाएगा और उस पर हमला किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य देश के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को रोकना है।
यह तनावपूर्ण स्थिति तब और बिगड़ गई जब सोमवार को अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिण-पूर्वी ईरान के चाबहार फ्री ट्रेड-इंडस्ट्रियल जोन के पास भीषण हमला किया। अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई को मिडिल ईस्ट में अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही, रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका अपने घातक बॉम्बर्स जैसे B-1 लांसर, B-2 स्पिरिट और B-52 स्ट्रेटोफोर्ट्रेस का उपयोग कर ईरान के भीतर बमबारी कर रहा है।
इस त्रिकोणीय संघर्ष में इजरायल ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इजरायली सेना ने हाल ही में दावा किया है कि उसने ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निजी विमान को नष्ट कर दिया है और उसकी तस्वीरें भी जारी की हैं। यह हमला ईरान के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा और मनोबल पर एक बड़ी चोट के रूप में देखा जा रहा है।
इस युद्ध का असर अब पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच भारत जैसे देशों में LPG संकट गहराने लगा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई बड़ी आईटी कंपनियों को अपने कैंटीन मेनू बदलने और कर्मचारियों को घर से टिफिन लाने की सलाह देनी पड़ी है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी अनिश्चितता के कारण सोना-चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
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यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड अमेरिकी नौसेना के सबसे उन्नत और शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक माना जाता है। इसे एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के हिस्से के रूप में तैनात करने का वाशिंगटन का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत करना है। हालांकि, ईरान की ताज़ा धमकी ने इस आधुनिक युद्धपोत और उसके सहायक नेटवर्क को सीधे युद्ध के केंद्र में ला खड़ा किया है।