US-इजरायल के हमले में नहीं...अपनी जिद की वजह से मारे गए खामेनेई, करीबी ने खोल दिया 'मौत' का हैरतअंगेज राज

Middle-East Tension: इजरायल और अमेरिका के हमले में अली खामेनेई की मौत कैसे हुई इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है। अब इस सवाल एक हैरान कर देने वाला जवाब अली खामेनेई के करीबी ने दे दिया है।
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अयातुल्ला अली खामेनेई (डिजाइन फोटो)
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Ayatollah Ali Khamenei Death Reason: इजरायल और अमेरिका के हमले में अली खामेनेई की मौत कैसे हुई इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है। लेकिन अब इसका जवाब मिल गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अपने सहयोगियों की बार-बार की गुजारिशों के बावजूद तेहरान स्थित अपने आवास को छोड़कर किसी सुरक्षित जगह जाने से इनकार कर दिया था।

एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में बोलते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि 37 वर्षों तक देश के सर्वोच्च नेता के रूप में सेवा करने वाले खामेनेई ने तेहरान, वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद अपने घर पर ही रहने का फैसला किया।

क्यों अपनी जिद पर अड़े थे खामेनेई?

इलाही ने बताया कि उन्होंने अली खामेनेई की सुरक्षा टीम से पूछा था कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह या दूसरे शहर में क्यों नहीं ले जाया जा रहा है, क्योंकि उनके दफ्तर और घर का पता तो सबको मालूम ही था। जवाब में सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि खामेनेई ने ऐसा करने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि वह अपना घर छोड़कर कहीं और जाने को तभी तैयार होंगे, जब तेहरान के 9 करोड़ लोगों के लिए भी सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराए जा सकें।

घर के नीचे बंकर बनाने से इनकार

इलाही ने आगे बताया कि उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों से यह भी पूछा था कि अगर खामेनेई दूसरे शहर नहीं जाना चाहते तो कम-से-कम उनके घर के नीचे बेसमेंट में ही एक बंकर बना दिया जाए। लेकिन, अधिकारियों ने बताया कि खामेनेई ने इसके लिए भी इजाजत नहीं दी। उन्होंने साफ कह दिया था कि वह अपने लिए बंकर बनवाने की इजाजत तभी देंगे, जब 9 करोड़ ईरानी लोगों के लिए भी ऐसे बंकर उपलब्ध कराए जा सकें।

खामनेई के परिवार ने क्या कुछ कहा?

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, यही सवाल खामेनेई के परिवार से भी पूछा गया था। परिवार ने बताया कि खामेनेई का मानना ​​है कि वह देश के नेता हैं और एक नेता को हमेशा गरीबों और आम लोगों के बराबर ही रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर वह एक अलग और खास ज़िंदगी जीने लगेंगे तो वह इस देश के नेता नहीं रह पाएंगे।

इस बैठक के दौरान जब उनसे इस्लाम में शहादत के महत्व के बारे में पूछा गया। तो इलाही ने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, शहादत को सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। उन्होंने आगे बताया कि खामेनेई की लंबे समय से शहादत पाने की दिली इच्छा रही है और वह इसे सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं।

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