अमेरिकी में प्रवासियों और नागरिक स्वतंत्रता पर बहस (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Senate Immigration Enforcement Debate: अमेरिकी सीनेट में संघीय स्तर पर आप्रवासन कानूनों की सख्ती और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस शुरू हो गई है। मिनेसोटा में चलाए गए ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ ने प्रवासी समुदायों और भारतीय वीजा धारकों के बीच भारी चिंता पैदा कर दी है। सीनेट की होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी इस अभियान के दौरान हुई हिंसा और दो अमेरिकी नागरिकों की मौत की गहन समीक्षा कर रही है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के बीच इस मुद्दे पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
मिनेसोटा में संघीय एजेंटों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ की व्यापक समीक्षा की जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य इमीग्रेशन नियमों को सख्ती से लागू करना था लेकिन इससे समाज में अस्थिरता बढ़ गई। भारतीय मूल के लोगों और ग्रीन कार्ड आवेदकों में इस कार्रवाई के बाद अपने भविष्य को लेकर काफी डर व्याप्त है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में दो अमेरिकी नागरिकों रेनी गूड और एलेक्स प्रीडी की मौत का मामला सबसे प्रमुखता से उठा है। ये दोनों नागरिक संघीय एजेंटों के साथ हुई अलग-अलग मुठभेड़ों के दौरान अपनी जान गंवा बैठे थे जिससे आक्रोश बढ़ा। सीनेट कमेटी अब इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर रही है ताकि जनता का खोया हुआ भरोसा फिर से हासिल किया जा सके।
कमेटी के चेयरमैन सीनेटर रैंड पॉल ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर सरकारी अधिकारियों की वीडियो बनाना एक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता बहुत जरूरी है और किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने नेताओं से अपील की कि वे ऐसे बयान न दें जिससे समाज में हिंसा या तनाव बढ़ने की संभावना हो।
दूसरी ओर सीनेटर गैरी पीटर्स ने संघीय अधिकारियों पर हिंसक और बहुत अधिक भारी-भरकम तरीकों का इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जानबूझकर पीड़ितों को हिंसक और उकसाने वाले के रूप में पेश करने की कोशिश की है जो गलत है। इस तरह के व्यवहार से आम नागरिकों की सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला होता है।
मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने इस अभियान को देश के इतिहास का सबसे बड़ा एकल आप्रवासन प्रवर्तन अभियान करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि इस तरह के कठोर अभियानों को तुरंत खत्म किया जाना चाहिए ताकि शांति बहाल हो सके। एलिसन ने स्पष्ट किया कि राज्य कानूनी सहयोग देने के खिलाफ नहीं है लेकिन प्रवर्तन के तरीके मानवीय होने चाहिए।
रिपब्लिकन प्रतिनिधि टॉम एमर ने इन आरोपों का कड़ा विरोध करते हुए राज्य के नेताओं की नीतियों को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मिनेसोटा को आपराधिक अवैध प्रवासियों का सुरक्षित ठिकाना बना दिया गया है जिससे सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। एमर के अनुसार अगर राज्य कानून का पालन करता तो यह अशांति पूरी तरह से टाली जा सकती थी।
आईसीई के कार्यवाहक निदेशक टॉड लायंस ने सुनवाई में बताया कि उनके अधिकारी लगातार धमकियों और हिंसक हमलों का सामना कर रहे थे। उन्होंने साफ किया कि कोई भी अमेरिकी नागरिक आप्रवासन प्रवर्तन के दायरे में नहीं आता है और कानून सबके लिए समान है। सुरक्षा बलों का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि वे केवल अपना कर्तव्य निभा रहे थे।
सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा आयुक्त रॉडनी स्कॉट ने भी माना कि अधिकारियों की वीडियो बनाना कोई कानूनी अपराध नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि गोलीबारी की घटनाओं की जांच जारी है और उचित समय आने पर कैमरा फुटेज सार्वजनिक की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे किसी भी जांच में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
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सुनवाई के दौरान मिनेसोटा और संघीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की आवश्यकता पर भी व्यापक चर्चा की गई। सीनेटर रैंड पॉल ने सुझाव दिया कि अंतिम निर्वासन आदेशों को लेकर अगर समन्वय बढ़ाया जाए तो जमीनी स्तर पर तनाव कम होगा। बेहतर संचार और स्पष्ट नीतियों से भविष्य में ऐसी हिंसक झड़पों को रोका जा सकता है।
आप्रवासन कानूनों पर यह बहस आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रवासी समुदायों को उम्मीद है कि सरकार उनके अधिकारों की रक्षा करेगी और प्रवर्तन के नाम पर उत्पीड़न नहीं होगा। फिलहाल सभी की नजरें जांच के नतीजों और फुटेज के जारी होने पर टिकी हुई हैं।