बांग्लादेश के पहले हिंदू सांसद गायेश्वर चंद्र रॉय (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bangladesh First Hindu MP: बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनाव के शुक्रवार को घोषित नतीजों ने एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज किया। राजधानी ढाका से आजादी के बाद पहली बार कोई हिंदू नेता सांसद चुना गया है। गयेश्वर चंद्र रॉय ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार एमडी शाहिनुर इस्लाम को हराया। यह जीत 1971 में स्वतंत्रता के बाद ढाका से चुने गए पहले हिंदू सांसद के रूप में दर्ज की गई है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ढाका-3 संसदीय क्षेत्र में गयेश्वर चंद्र रॉय ने 98,785 वोट प्राप्त किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी शाहिनुर इस्लाम को 82,232 वोट मिले। ढाका के रिटर्निंग ऑफिसर और जिला आयुक्त एमडी रेजाउल करीम ने आधिकारिक रूप से परिणामों की पुष्टि की। इस जीत को राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गयेश्वर चंद्र रॉय लंबे समय से बीएनपी के वरिष्ठ नेता रहे हैं और विशेष रूप से अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दों को मुखरता से उठाते रहे हैं। पार्टी ने उन्हें ढाका-3 से उम्मीदवार बनाकर एक स्पष्ट संदेश दिया था, जिसे मतदाताओं ने समर्थन दिया। उनकी जीत के बाद हिंदू समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों में उत्साह देखा गया।
BNP’s Hindu candidate, Gayeshwar Chandra Roy, scores a landslide victory, defeating Jamaat by a large margin to win Dhaka-3.
Having a Hindu candidate win in the capital is a significant milestone. pic.twitter.com/0tjs2dv67s — Voice Of BD Hindus 🇧🇩 (@ItzBDHindus) February 12, 2026
दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने खुलना-1 (दाकोप-बोटियाघाटा) सीट से अपने एकमात्र हिंदू उम्मीदवार कृष्ण नंदी को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें 50,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इस सीट पर बीएनपी के अमीर एजाज खान विजयी रहे।
इस चुनाव में हिंदू मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही, हालांकि अल्पसंख्यक सुरक्षा को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। बीएनपी की व्यापक बढ़त, जो 200 से अधिक सीटों की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, से उम्मीद जताई जा रही है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में पार्टी अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर अधिक सक्रिय और संवेदनशील नीति अपनाएगी।
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यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद आयोजित पहला बड़ा संसदीय चुनाव था, जिसमें अवामी लीग भाग नहीं ले सकी। ऐसे में गयेश्वर चंद्र रॉय की जीत को बीएनपी की समावेशी छवि को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।