ट्रंप ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, 25 साल बाद पेशावर अमेरिकी दूतावास पर स्थायी ताला, जानें क्या है वजह
Peshawar US Consulate Closed: अमेरिका ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अपने रणनीतिक वाणिज्य दूतावास को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। जानिए ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के पीछे की असली वजह और इसके प्रभाव।
- Written By: अमन उपाध्याय
पेशावर में अमेरिकी दूतावास पर लगा स्थायी ताला, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Why US Closed Peshawar Consulate: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, अमेरिका ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अपने वाणिज्य दूतावास को स्थायी रूप से बंद करने का कड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि अब इस मिशन का संचालन दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।
यह दूतावास न केवल एक राजनयिक केंद्र था, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था क्योंकि यह अफगान सीमा के सबसे नजदीक स्थित अमेरिकी मिशन था।
2001 से था प्राथमिक संचालन केंद्र
पेशावर स्थित यह वाणिज्य दूतावास 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद से ही एक प्राथमिक संचालन केंद्र के रूप में कार्य कर रहा था। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के दौरान इस केंद्र ने खुफिया जानकारी साझा करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में अमेरिकी हितों की निगरानी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यहां वर्तमान में 18 अमेरिकी राजनयिक और सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ 89 स्थानीय कर्मचारी कार्यरत थे। मंत्रालय ने बताया है कि इस दूतावास को पूरी तरह बंद करने की प्रक्रिया में लगभग 30 लाख अमेरिकी डॉलर का खर्च आएगा।
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बजट में कटौती या सुरक्षा कारण?
अमेरिकी प्रशासन ने इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से आर्थिक कारणों का हवाला दिया है। अमेरिकी संसद को भेजी गई अधिसूचना के अनुसार, इस दूतावास को बंद करने से अमेरिकी खजाने को प्रति वर्ष लगभग 75 लाख अमेरिकी डॉलर की बचत होगी।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इससे पाकिस्तान में अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की उनकी क्षमता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, सूत्रों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा संघीय एजेंसियों में की जा रही भारी कटौती के तहत यह कदम एक साल से अधिक समय से विचाराधीन था।
ईरान युद्ध और पाकिस्तान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन
भले ही अमेरिका इसे प्रशासनिक फैसला बता रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग बेहद संवेदनशील है। वर्तमान में ईरान-इजराइल युद्ध के कारण पाकिस्तान के कराची, पेशावर, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे शहरों में अमेरिका विरोधी हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।
हाल ही में इजराइल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में पाकिस्तान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। 1 मार्च को कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश में 12 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए थे। इन्हीं सुरक्षा चुनौतियों के कारण पेशावर और कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों ने पहले ही अपना संचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।
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इसका क्या होगा असर?
अमेरिकी दूतावास का बंद होना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। अफगान सीमा पर स्थित इस महत्वपूर्ण मिशन के खत्म होने से क्षेत्र में अमेरिका की प्रत्यक्ष मौजूदगी कम होगी, जिसका असर आने वाले समय में सीमावर्ती सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।
