Israel killed Khamenei: 90 दिन पहले ही बन गया था खामेनेई के खात्मे का प्लान, सीक्रेट मीटिंग का बड़ा खुलासा

Israel के रक्षा मंत्री ने खुलासा किया है कि अली खामेनेई को मारने का फैसला नवंबर 2025 में ही ले लिया गया था। हमला 2026 के मध्य में किया जाना था। लेकिन ईरान में बदलते हालात को देखते हुए पहले किया गया।
Israel killed Khamenei
अयातुल्ला अली खामेनेई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US-Israel Joint Air Strike Iran: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने 5 मार्च 2026 को एक टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को खत्म करने की योजना रातों-रात नहीं बनी थी, बल्कि इसकी पटकथा लगभग 90 दिन पहले ही लिख दी गई थी। काट्ज के अनुसार, यह ऐतिहासिक फैसला पिछले साल नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई एक अत्यंत गोपनीय बैठक में लिया गया था।

नवंबर 2025 में बनी थी सीक्रेट योजना

रक्षा मंत्री काट्ज ने 'चैनल 12 टीवी' को दिए इंटरव्यू में बताया कि नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक बहुत ही छोटे और चुनिंदा समूह की बैठक बुलाई थी। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को रास्ते से हटाना था। इजरायल का मानना था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसकी बढ़ती बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता इजरायल के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी है।  नेतन्याहू ने उस बैठक में स्पष्ट किया था कि इस खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए खामेनेई को निशाना बनाना अनिवार्य है।

क्यों बदला गया ऑपरेशन का समय?

शुरुआती योजना के अनुसार, इस ऑपरेशन को मध्य 2026 में अंजाम दिया जाना था। हालांकि, जनवरी 2026 में ईरान के भीतर बदले हालातों ने इजरायल को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। उस समय ईरान में सरकार विरोधी बड़े प्रदर्शन शुरू हो गए थे और इजरायल को अंदेशा था कि आंतरिक दबाव झेल रहा ईरानी नेतृत्व किसी भी समय इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सकता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि ईरान पहल करे, इसलिए योजना को समय से पहले प्रभावी कर दिया गया और इसमें अमेरिका को भी शामिल किया गया।

28 फरवरी का सटीक हमला और खामेनेई का अंत

तैयारियों को अंतिम रूप देने के बाद, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एक व्यापक हवाई अभियान शुरू किया। यह हमला इतना सटीक और भीषण था कि पहले ही कुछ घंटों में अयातुल्ला अली खामेनेई अपने आवास और दफ्तर के इलाके में मारे गए। सूत्रों के अनुसार, जिस इमारत पर बम गिराया गया, उसमें खामेनेई के साथ ईरान के कई अन्य शीर्ष सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे, जो इस हमले में मारे गए। यह आधुनिक इतिहास में पहली बार है जब किसी देश के सर्वोच्च नेता को दूसरे देश ने हवाई हमले में मार गिराया हो।

परमाणु खतरा खत्म करना इजरायल का लक्ष्य

खामेनेई की मौत के बाद भी इजरायल का अभियान रुका नहीं है। इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम और मिसाइल प्रोजेक्ट को पूरी तरह ध्वस्त करना है। रक्षा मंत्री काट्ज ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान कोई नया नेता चुनता है और वह भी इजरायल को नष्ट करने की विचारधारा रखता है, तो वह भी इजरायल का निशाना बनेगा। उनका कहना है कि इजरायल अब किसी भी ऐसे खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा जो उसके अस्तित्व को चुनौती दे।

युद्ध की आग में झुलसता मिडिल ईस्ट

इस हमले ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की विभीषिका में झोंक दिया है। संयुक्त हवाई हमला पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से जारी है। जवाब में ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइलें दागी हैं और खाड़ी देशों के साथ-साथ इराक में भी हमले किए हैं। इजरायल ने लेबनान में ईरान के सहयोगी हिजबुल्लाह पर भी हमले तेज कर दिए हैं। इस तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, जिससे दुनिया भर के देशों में चिंता बढ़ गई है। फिलहाल, न तो ईरान झुकने को तैयार है और न ही अमेरिका-इजरायल अपना अभियान रोकने के संकेत दे रहे हैं। यह घटनाक्रम दशकों पुरानी इजरायल-ईरान दुश्मनी का सबसे घातक अध्याय साबित हो रहा है।

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