चीन की घेराबंदी तेज! एशिया में तैनात हुए अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन, 50,000 फीट की ऊंचाई से ड्रैगन पर है नजर

MQ-9 Reaper Drone: अमेरिका एशिया में अपने घातक MQ-9 रीपर ड्रोन की तैनाती बढ़ा रहा है। 50,000 फीट की ऊंचाई से निगरानी और अचूक हमले की क्षमता रखने वाला यह ड्रोन अब चीन के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बन
China's siege intensifies! American MQ-9 Reaper drones deployed in Asia, keeping an eye on the Dragon from an altitude of 50,000 feet.
MQ-9 रीपर ड्रोन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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US China Tension: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अमेरिका ने अब 'आसमान के शिकारी' कहे जाने वाले MQ-9 रीपर ड्रोन को अपना मुख्य हथियार बना लिया है। सूत्रों और विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका चीन के चारों ओर एक ऐसा अभेद्य निगरानी नेटवर्क तैयार कर रहा है जिससे बच पाना ड्रैगन के लिए नामुमकिन होता जा रहा है। यह ड्रोन न केवल जासूसी करने में माहिर है बल्कि जरूरत पड़ने पर पलक झपकते ही दुश्मन का सफाया भी कर सकता है।

27 घंटे तक आसमान में पहरा

MQ-9 रीपर की सबसे बड़ी ताकत इसकी 15,240 मीटर (करीब 50,000 फीट) की ऊंचाई तक उड़ने की क्षमता है। यह ड्रोन करीब 480 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह लगातार 27 घंटों तक हवा में रहकर दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकता है। इसकी कम दिखाई देने वाली तकनीक इसे और भी खतरनाक बनाती है जिससे अमेरिका चीन की सीमा से दूर रहकर भी उसके सैन्य ठिकानों की निगरानी कर पा रहा है। ऐतिहासिक रूप से इस ड्रोन का इस्तेमाल 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के खात्मे जैसे हाई-प्रोफाइल मिशनों में किया जा चुका है।

तकनीकी श्रेष्ठता और हथियारों का जखीरा

यह ड्रोन हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों, हाईटेक सेंसर और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस है जो इसे रियल-टाइम जानकारी भेजने में सक्षम बनाते हैं। इसके नए वैरिएंट MQ-9B सी गार्डियन में अब पहले से दोगुने सोनाबॉय गिराने की क्षमता है जो समुद्र की गहराई में छिपी पनडुब्बियों का पता लगाने के काम आते हैं। इसके अलावा, यह लेजर-गाइडेड बम और मिसाइलों जैसे घातक हथियार भी ढो सकता है।

चीन के चारों ओर 'ड्रोन की दीवार'

अमेरिका ने रणनीतिक रूप से जापान के ओकिनावा पर 14 ड्रोन तैनात किए हैं जबकि दक्षिण कोरिया और फिलीपींस में भी इनकी मौजूदगी बढ़ाई गई है। यहां से पूर्वी चीन सागर, ताइवान स्ट्रैट और दक्षिण चीन सागर पर पैनी नजर रखी जा रही है। भारत भी इस नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। भारत ने 2020 में दो ड्रोन लिए थे और 2024 में 3.5 अरब डॉलर का समझौता कर 31 और ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है। ताइवान ने भी 4 ड्रोन मंगवाए हैं जिससे चीन की मुश्किल बढ़ गई है।

चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के पास भले ही अपना एयर डिफेंस सिस्टम और लेजर हथियार हों लेकिन 'शांति के समय' में इन ड्रोन के साझा निगरानी नेटवर्क का जवाब देना उसके लिए एक बड़ी सिरदर्द बन गया है। इन ड्रोन के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन के खिलाफ एक साझा इंटेलिजेंस ग्रिड बना रहे हैं।

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