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ईरान युद्ध में अमेरिका का सबसे घातक हथियार… क्या है ‘Gravity Bomb’ जिससे कांप उठा है तेहरान?
Precision Gravity Bombs: अमेरिका ने ईरान को 'प्रिसिजन ग्रेविटी बमों' के इस्तेमाल की धमकी दी है। पेंटागन का दावा है कि एक हफ्ते में ईरान का आसमान उनके नियंत्रण में होगा और युद्ध अब निर्णायक मोड़ पर है।
- Written By: प्रिया सिंह

प्रिसिजन ग्रेविटी बम (सोर्स-सोशल मीडिया)
Precision Gravity Bombs In Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिका ने अपने सबसे खतरनाक हथियारों के भंडार खोलने का संकेत दिया है। पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना जल्द ही ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह कब्जा कर लेगी। इस सैन्य अभियान में प्रिसिजन ग्रेविटी बमों का जिक्र होने से पूरी दुनिया में परमाणु युद्ध की आशंका गहरा गई है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब ईरान पहले से ही चौतरफा हमलों से कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।
पेंटागन प्रमुख का बड़ा दावा
पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ जारी इस जंग को लेकर बहुत ही आक्रामक और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ दावा किया है कि अमेरिका यह युद्ध जीत रहा है और दुश्मन की हालत अब बहुत खराब है। आने वाले एक हफ्ते के भीतर ईरान के आसमान पर अमेरिका और इजरायल का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो जाएगा।
घातक बमों का असीमित भंडार
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार यह अभियान अभी अपने शुरुआती चरण में है और भविष्य में हमलों की नई लहरें आएंगी। अमेरिका इस मिशन को अंजाम देने के लिए अपने ‘प्रिसिजन ग्रेविटी बमों’ के असीमित भंडार का उपयोग करने के लिए तैयार है। ये बम इतने सटीक और मारक हैं कि दुश्मन के किसी भी मजबूत ठिकाने को पल भर में राख कर सकते हैं।
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क्या होता है ग्रेविटी बम?
ग्रेविटी न्यूक्लियर बमों को ‘फ्री-फॉल बम’ भी कहा जाता है क्योंकि ये गिरने के लिए पूरी तरह गुरुत्वाकर्षण बल पर निर्भर हैं। ये बम मिसाइलों की तरह खुद नहीं चलते बल्कि इन्हें खास विमानों के जरिए ऊँचाई से सीधे लक्ष्य पर गिराया जाता है। अपनी रफ्तार और गुरुत्वाकर्षण की ताकत से ये बम जमीन के अंदर तक तबाही मचाने की क्षमता रखते हैं।
परमाणु तकनीक का महाविनाश
ज्यादातर आधुनिक ग्रेविटी बम थर्मोन्यूक्लियर तकनीक पर आधारित होते हैं जो फिशन और फ्यूजन दोनों प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाली फ्यूजन रिएक्शन एटॉमिक न्यूक्लिआई को मिलाकर अविश्वसनीय मात्रा में विनाशकारी ऊर्जा पैदा करती है। यह घातक कॉम्बिनेशन इन हथियारों को पुराने समय के साधारण परमाणु बमों की तुलना में कई गुना अधिक खतरनाक बनाता।
हथियारों की मारक क्षमता
इन बमों की सबसे बड़ी खासियत इनकी ‘डायल-ए-यील्ड’ तकनीक है जिससे इनके विस्फोट की क्षमता को बदला जा सकता है। इससे सेना यह तय कर सकती है कि हमला कितना बड़ा या छोटा होगा ताकि रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। इस तरह के आधुनिक हथियार अब युद्ध के मैदान में अमेरिका की सैन्य ताकत का सबसे बड़ा आधार बन रहे हैं।
ईरान की पलटवार की धमकी
इस भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने भी अब सीधे तौर पर इजरायल के परमाणु ठिकानों पर हमला करने की चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि अगर उसकी संप्रभुता पर आंच आई तो वह परमाणु केंद्रों को उड़ाने में जरा भी देरी नहीं करेगा। युद्ध के छठे दिन तक आते-आते जान-माल का इतना नुकसान हो चुका है कि पूरी दुनिया में डर है।
यह भी पढ़ें: ईरान की इजरायल को परमाणु हमले की चेतावनी, सत्ता परिवर्तन की कोशिशों पर भड़का तेहरान
भारत पर युद्ध का असर
युद्ध की इस आग की आंच अब भारत तक भी पहुंच गई है जहां सुरक्षा कारणों से करीब 180 फ्लाइट्स को कैंसिल कर दिया गया है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है क्योंकि हवाई रास्तों में खतरा बढ़ गया है। श्रीलंका ने भी भारत को हिंद महासागर में ईरानी जहाजों पर हो रहे हमलों के प्रति आगाह किया है।
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