ओमान में खत्म हुई अमेरिका-ईरान की बातचीत, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US-Iran Talks News In Hindi: मध्य पूर्व में जारी तनाव के माहौल के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम बातचीत हुई। यह वार्ता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर थी और हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच बढ़े सैन्य टकराव और आपसी अविश्वास के बाद इसे पहली बड़ी कूटनीतिक कोशिश माना जा रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने इन वार्ताओं को एक सकारात्मक शुरुआत बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह बातचीत सिर्फ आने वाली बैठकों की रूपरेखा तय करने तक सीमित रही। ईरानी सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच पनपा गहरा अविश्वास एक बड़ी समस्या है जिसे आगे की बातचीत से पहले दूर करना जरूरी होगा।
यह वार्ता मस्कट के बाहरी इलाके में स्थित एक महल में आयोजित की गई थी, जहां ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात की। अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुश्नर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने किया। इस बैठक की सबसे असामान्य बात अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की मौजूदगी रही, जिसे ईरान के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि यदि कूटनीति विफल होती है तो वाशिंगटन सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है।
तनाव और सैन्य गतिविधियों से घिरे माहौल में यह कूटनीतिक पहल की जा रही है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन केंद्रों पर हवाई हमले किए थे जिसके बाद ईरान के भीतर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। इसके अलावा जून में इजराइल और ईरान के बीच करीब 12 दिनों तक चला युद्ध भी हालात को और गंभीर बना गया।
फिलहाल क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन समेत कई युद्धपोतों की मौजूदगी से तनाव और बढ़ गया है। खाड़ी देशों को आशंका है कि किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से पूरा इलाका युद्ध की चपेट में आ सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मिस्र, तुर्की और कतर ने ईरान को एक प्रस्ताव दिया है जिसमें ईरान को तीन साल के लिए संवर्धन रोकने, अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने और बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग न करने का वादा करना होगा।
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हालांकि, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने या यूरेनियम को विदेश भेजने के विकल्प को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे ‘नॉन-स्टार्टर’ बताया है। वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संभावित समझौते में इन सभी मुद्दों को शामिल करना जरूरी होगा।