Operation Meltdown: नशा मुक्ति में भारत-US का बड़ा एक्शन, 200 से ज्यादा अवैध ऑनलाइन फार्मेसी डोमेन किए गए जब्त
DEA Operation Meltdown: अमेरिका में फेंटेनाइल संकट के खिलाफ जंग में भारत की भूमिका अहम हो गई है। ऑपरेशन मेल्टडाउन के तहत 200 से ज्यादा अवैध ऑनलाइन फार्मेसी डोमेन जब्त कर ड्रग नेटवर्क को तोड़ा गया है।
- Written By: प्रिया सिंह
नशा मुक्ति के खिलाफ भारत कर रहा अमेरिका की मदद (सोर्स-सोशल मीडिया)
India US Drug Enforcement Cooperation: अमेरिका में फेंटेनाइल संकट के खिलाफ जारी जंग में भारत और अमेरिका की एजेंसियों को एक बहुत बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) ने ‘ऑपरेशन मेल्टडाउन’ के तहत एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जो भारत से संचालित हो रहा था। इस कार्रवाई के तहत 200 से ज्यादा अवैध इंटरनेट डोमेन जब्त किए गए हैं जो नकली दवाओं की तस्करी में शामिल थे। यह ऑपरेशन वैश्विक ड्रग सप्लाई चेन को जड़ से उखाड़ने की दिशा में दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक और सुरक्षा सहयोग का प्रमाण है।
ऑपरेशन मेल्टडाउन की बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) ने 4 फरवरी 2026 को खुलासा किया कि उसने ऑपरेशन मेल्टडाउन के तहत 200 से अधिक इंटरनेट डोमेन जब्त किए हैं। यह पूरी जांच साल 2022 से रॉकी माउंटेन फील्ड डिवीजन की देखरेख में चल रही थी जिसका मुख्य लक्ष्य डिजिटल ड्रग नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना था। इस ऑपरेशन की सफलता से अमेरिका में अवैध दवाओं की आपूर्ति करने वाले एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह की कमर टूट गई है।
भारत आधारित आपराधिक नेटवर्क
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन अवैध ऑनलाइन फार्मेसियों को भारत आधारित एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क द्वारा चलाया जा रहा था। ये तस्कर इंटरनेट डोमेन का उपयोग करके नकली दवाइयों को असली पेनकिलर और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के नाम पर अमेरिकी ग्राहकों को बेच रहे थे। बाहर से देखने पर ये गोलियां पूरी तरह वैध लगती थीं लेकिन वास्तव में इनमें घातक फेंटेनाइल मिलाया गया था जो जानलेवा साबित हो रहा था।
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घातक फेंटेनाइल और मौत के आंकड़े
DEA के अनुसार इस नेटवर्क का सीधा संबंध अमेरिका में कम से कम 6 लोगों की मौत और 4 गैर-घातक ओवरडोज की घटनाओं से पाया गया है। फेंटेनाइल इतना शक्तिशाली सिंथेटिक ओपिओइड है कि इसकी एक छोटी सी गोली भी किसी भी व्यक्ति के लिए तुरंत जानलेवा साबित हो सकती है। हालांकि 2024 में अमेरिका में ओवरडोज से होने वाली मौतों में गिरावट आई थी लेकिन फिर भी लगभग 80,000 लोगों की जान इस संकट के कारण गई है।
बदलती तस्करी और डिजिटल हथियार
अपराधियों ने अब ड्रग तस्करी का तरीका बदल दिया है और वे सड़क किनारे डीलरों के बजाय नकली वेबसाइट्स, सोशल मीडिया और डार्कनेट का सहारा ले रहे हैं। ये डिजिटल प्लेटफॉर्म अब तस्करों के नए हथियार बन चुके हैं जिनके माध्यम से वे सीधे अमेरिकी उपभोक्ताओं के घरों तक घातक दवाएं पहुंचा रहे हैं। इस खतरे को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य हो गया है क्योंकि फेंटेनाइल की सप्लाई चेन अब एक जटिल ग्लोबल सिस्टम में बदल चुकी है।
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भारत-अमेरिका सहयोग की भूमिका
DEA ने अपनी प्रेस रिलीज में स्पष्ट रूप से कहा कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को तोड़ने के लिए भारत सरकार की एजेंसियों के साथ सहयोग अत्यंत निर्णायक रहा है। भारत में ‘नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (NCORD) के तहत विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं ताकि ड्रग तस्करी के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके। पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच यह सहयोग वैश्विक स्तर पर नशा मुक्त समाज बनाने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद है।
