श्रीलंका ब्रिटेन से करेगा ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी की मांग (सोर्स-सोशल मीडिया)
Sri Lanka Demands Colonial Compensation: श्रीलंका सरकार ने ब्रिटिश शासन के दौरान हुई लूट और सांस्कृतिक विरासत के नुकसान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संसद में स्पष्ट किया कि देश अब ब्रिटेन से मुआवजे और धरोहरों की वापसी की कानूनी मांग करेगा। यह ऐतिहासिक कदम उस समय आया है जब दुनिया के कई देश अपने पूर्व शासकों से हर्जाने की मांग कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य संपत्ति, जीवन और गौरवशाली विरासत को हुए भारी नुकसान की भरपाई करना है।
ब्रिटेन ने श्रीलंका पर 1796 से लेकर 1948 तक शासन किया जिसे उस समय सीलोन के नाम से जाना जाता था। इस लंबी अवधि के दौरान ब्रिटिश सेनाओं ने अंतिम स्वतंत्र कांडी साम्राज्य से शाही ताज, सिंहासन और तलवारें छीन ली थीं। यद्यपि कुछ वस्तुएं समय के साथ लौटाई गईं लेकिन एक बड़ी संख्या आज भी विदेशी म्यूजियम और निजी कलेक्शन में बंद है।
श्रीलंका द्वारा मांगी जा रही धरोहरों में आठवीं शताब्दी की बौद्ध देवी तारा की कांस्य प्रतिमा सबसे प्रमुख और कीमती है। ठोस कांसे से बनी और सोने की परत से ढकी यह प्राचीन मूर्ति वर्तमान में लंदन के प्रसिद्ध ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है। त्रिंकोमाली के पास मिली यह मूर्ति श्रीलंका की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक अमूल्य और ऐतिहासिक हिस्सा मानी जाती है।
सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी की दिशा में श्रीलंका को दिसंबर 2023 में नीदरलैंड से एक बहुत बड़ी सफलता मिली है। नीदरलैंड ने हीरे जड़ी सोने की तलवार और लेव्के की तोप सहित 250 साल पुरानी कई वस्तुएं श्रीलंका को वापस लौटाईं। वर्तमान में ये सभी ऐतिहासिक वस्तुएं कोलंबो के नेशनल म्यूजियम में आम जनता के प्रदर्शन के लिए सम्मानपूर्वक रखी गई हैं।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इन अनमोल धरोहरों को वापस लाना कोई आसान या सरल कानूनी प्रक्रिया नहीं होने वाली है। अनेक ऐतिहासिक वस्तुएं निजी संग्राहकों के पास मौजूद हैं जिन पर दबाव बनाना सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है। कुछ आलोचकों का यह भी कहना है कि सरकार आर्थिक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठा रही है।
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विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा के सवाल पर विदेश मंत्री ने साफ किया कि केवल वस्तुएं ही वापस नहीं मांगी जाएंगी। सरकार संपत्ति की चोरी और जानमाल के नुकसान के लिए ब्रिटेन से उचित वित्तीय मुआवजे की मांग भी मजबूती से करेगी। कांडी युद्धों के दौरान लूटी गई तोपें आज भी ब्रिटेन के विंडसर कैसल में मौजूद हैं जिन्हें वापस लाना प्राथमिकता है।