Iran युद्ध से अमेरिकी सेना वापस बुलाने का विपक्षी प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा में पूरी तरह से हुआ विफल

US Troop Withdrawal: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में Iran युद्ध से सेना को वापस बुलाने का विपक्ष का प्रस्ताव 213-214 मतों से विफल हो गया है। ट्रंप के इस सैन्य अभियान को रिपब्लिकनों का पूरा समर्थन मिला है।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
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US Military Action In Iran: अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ लाया गया एक अहम प्रस्ताव गिर गया है। विपक्षी डेमोक्रेट्स ने Iran युद्ध से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने की पुरजोर मांग की थी। हालांकि, यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव 213-214 मतों के मामूली अंतर से बुरी तरह विफल साबित हुआ है। इस तरह के Iran में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का रिपब्लिकन पार्टी लगातार समर्थन करती आ रही है।

सीनेट में भी प्रस्ताव फेल

प्रतिनिधि सभा से ठीक पहले अमेरिकी सीनेट में भी ऐसा ही एक विपक्षी प्रस्ताव असफल हो चुका है। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर एक बड़ा और कड़ा हमला किया था। इसके बाद से एक बहुत ही नाजुक युद्धविराम अब अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है।

डेमोक्रेट्स की बड़ी चिंताएं

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं को डर है कि अमेरिका एक और लंबे संघर्ष में उलझता जा रहा है। विदेश मामलों की कमेटी के डेमोक्रेट ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि हर दिन की देरी खतरनाक है। उनका मानना है कि इस भयंकर संघर्ष से बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा है।

रिपब्लिकन का बचाव

रिपब्लिकन नेताओं ने डेमोक्रेट्स के इस प्रयास को पूरी तरह से पाखंडी करार देने की कोशिश की है। ब्रायन मास्ट ने याद दिलाया कि 2024 में जो बाइडेन के समय ऐसा कोई भी मतदान नहीं हुआ था। उस वक्त भी अमेरिका ने यमन में Iran समर्थित हूथियों पर लंबी और कढ़ी सैन्य कार्रवाई की थी।

युद्ध शक्ति अधिनियम 1973

साल 1973 के युद्ध शक्ति अधिनियम के तहत कांग्रेस को 60 दिनों के भीतर युद्ध घोषित करना होता है। Iran युद्ध के मामले में यह महत्वपूर्ण समय सीमा अप्रैल महीने के अंत तक पूरी हो जाएगी। हालांकि, इस मौजूदा कानून में संभावित 30 दिनों के विस्तार का भी एक खास प्रावधान शामिल है।

युद्ध के नकारात्मक प्रभाव

प्रमिला जयपाल ने बताया कि कम से कम 13 सैन्यकर्मियों की मौत हो चुकी है जो बेहद दुखद है। युद्ध के कारण आसमान छूती कीमतों से पेट्रोल अब 7 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है। इसके अलावा बिना किसी ठोस योजना के 10,000 अमेरिकी सैनिकों को मध्य पूर्व में भेजा जा रहा है।

सैनिकों की भारी तैनाती

इस तनावपूर्ण युद्ध क्षेत्र में पहले से ही 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए हैं। डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया है कि इस भयंकर युद्ध में अब तक अरबों डॉलर का खर्च हो चुका है। इस तरह के एकतरफा कदमों से अमेरिका के पुराने सहयोगियों के साथ बड़ी दरार पैदा हो रही है।

ट्रंप का पूर्ण समर्थन

रिपब्लिकन सांसद जो विल्सन ने राष्ट्रपति ट्रंप का बचाव करते हुए उनके कड़े फैसलों को सराहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को धमकाने वालों को अब जवाबदेह ठहराया जा रहा है। इससे पहले मार्च की शुरुआत में भी सदन में पहला मतदान 212-219 मतों के अंतर से विफल हुआ था।

आगे की सख्त रणनीति

डेमोक्रेट्स ने आने वाले कुछ हफ्तों में युद्ध शक्तियों पर और अधिक मतदान कराने का वादा किया है। वे लगातार इस अहम मुद्दे को उठाकर ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बनाए रखना चाहते हैं। उधर रिपब्लिकन का मानना है कि ईरानी सरकार ने मध्य पूर्व को लंबे समय से आतंकित किया है।

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