1971 हिंदू नरसंहार: 55 साल बाद कठघरे में खड़ा होगा पाकिस्तान, हिंदुओं के कत्लेआम पर शहबाज-मुनीर की बढ़ी मुसीबत

1971 Bangladesh Genocide: अमेरिकी कांग्रेस में 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए 'हिंदू नरसंहार' को मान्यता देने का प्रस्ताव पेश हुआ है।
1971 Hindu Genocide: 55 Years Later, Pakistan to Stand in the Dock; Trouble Mounts for Shehbaz and Munir Over the Massacre of Hindus.
1971 में भारत में आए शरणार्थी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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US Congress Resolution 1971 Bangladesh Hindu Genocide: साल 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी हलचल शुरू हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें उस समय की पाकिस्तानी सेना की बर्बरता को 'जनसंहार' घोषित करने की मांग की गई है। यदि अमेरिकी संसद इस प्रस्ताव पर मुहर लगा देती है, तो पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़ी कूटनीतिक और कानूनी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन की बड़ी पहल

ओहायो से डेमोक्रेट सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने इस प्रस्ताव को पेश किया है, जिसे अब विचार के लिए विदेश मामलों की समिति को भेज दिया गया है। इस प्रस्ताव में विशेष रूप से 25 मार्च 1971 को शुरू हुए हमलों का जिक्र किया गया है, जिसमें पाकिस्तानी सेना और जमात-ए-इस्लामी जैसे उसके सहयोगी संगठनों ने बंगाली हिंदुओं को अपना मुख्य निशाना बनाया था। प्रस्ताव में मांग की गई है कि इन कृत्यों को 'युद्ध अपराध' और 'नरसंहार' के रूप में आधिकारिक मान्यता दी जाए।

हिंदुओं का सुनियोजित कत्लेआम

सूत्रों के अनुसार, 25 मार्च 1971 की रात को पाकिस्तानी सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को जेल में डाल दिया था और इसके तुरंत बाद 'ऑपरेशन सर्चलाइट' शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तानी सैन्य टुकड़ियों ने कट्टरपंथी समूहों के साथ मिलकर पूरे पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बड़े पैमाने पर नागरिकों की हत्याएं कीं। प्रस्ताव में इस बात को रेखांकित किया गया है कि पाकिस्तानी सेना ने न केवल राजनीतिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और छात्रों की हत्या की, बल्कि हजारों महिलाओं को यौन दासी बनने पर मजबूर किया। विशेष रूप से हिंदू अल्पसंख्यकों को सामूहिक बलात्कार, जबरन धर्म-परिवर्तन और देश निकाला के जरिए पूरी तरह मिटाने की कोशिश की गई थी।

'ब्लड टेलीग्राम' ने खोली थी पोल

इस प्रस्ताव में उस समय ढाका में तैनात अमेरिकी वाणिज्य दूत आर्चर ब्लड द्वारा भेजे गए प्रसिद्ध 'ब्लड टेलीग्राम' का भी उल्लेख किया गया है। इस टेलीग्राम में स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था कि पाकिस्तानी सेना की मदद से गैर-बंगाली मुस्लिम समूह बंगालियों और हिंदुओं की व्यवस्थित हत्या कर रहे हैं। हालांकि, उस समय अमेरिका ने इसे एक संप्रभु राष्ट्र का 'आंतरिक मामला' मानकर हस्तक्षेप नहीं करने का फैसला किया था।

पाकिस्तान पर बढ़ सकता है प्रतिबंधों का खतरा

यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी बढ़ जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके आधार पर अमेरिका कुछ विशिष्ट पाकिस्तानी व्यक्तियों या संस्थाओं पर लक्षित प्रतिबंध भी लगा सकता है। प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति से भी आग्रह किया गया है कि वे 1971 के इन अत्याचारों को 'मानवता के खिलाफ अपराध' के रूप में मान्यता दें।

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