

Ukraine Russia Peace Security Guarantees: रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पेरिस में आयोजित 'कोएलिशन ऑफ द विलिंग' की बैठक एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में 35 देशों के प्रतिनिधियों ने भविष्य के शांति समझौते के बाद यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं' (Binding Commitments) पर सहमति जताई है।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चा के बीच वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति ट्रंप के ग्रीनलैंड संबंधी बयानों ने वैश्विक समीकरणों को बदल दिया है। यूरोपीय देशों को डर है कि अमेरिका का ध्यान अब यूरोप से हटकर पश्चिमी गोलार्ध की ओर केंद्रित हो रहा है।
राष्ट्रपति मैक्रों के नेतृत्व में 'कोएलिशन ऑफ द विलिंग' ने यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार की है। बैठक में यह तय हुआ कि किसी भी भविष्य के समझौते के बाद यूक्रेन की अपनी सेना रक्षा की पहली पंक्ति होगी, जिसे पश्चिमी देश आधुनिक हथियारों और प्रशिक्षण से मजबूत करेंगे। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रूस दोबारा हमला करने की हिम्मत न जुटा सके।
इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा परिणाम अमेरिका द्वारा सीजफायर निगरानी तंत्र (Ceasefire Monitoring Mechanism) का नेतृत्व करने पर सहमति देना रहा है। इसके तहत ड्रोन, सेंसर और उपग्रहों के जरिए युद्धविराम के उल्लंघन पर कड़ी नजर रखी जाएगी, जिसमें यूरोपीय देश भी सक्रिय भागीदारी करेंगे। स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर की मौजूदगी ने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन शांति प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप करने को तैयार है।
फ्रांस, ब्रिटेन और यूक्रेन ने एक त्रिपक्षीय घोषणापत्र (Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो शांति समझौते के बाद यूक्रेनी क्षेत्र में विदेशी सेना की तैनाती का कानूनी आधार तैयार करेगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की कि युद्धविराम के बाद यूक्रेन में 'मिलिट्री हब' बनाए जाएंगे। ये हब न केवल सुरक्षा प्रदान करेंगे बल्कि हथियारों के भंडारण और यूक्रेन की सैन्य क्षमता के पुनर्निर्माण में भी सहायक होंगे।
जहां एक ओर यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर चर्चा हो रही थी, वहीं वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी ने अमेरिकी प्राथमिकताओं को बदल दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वेनेजुएला संकट के कारण अपनी पेरिस यात्रा रद्द कर दी, जिससे यूरोपीय सहयोगियों में असुरक्षा का भाव बढ़ा है। साथ ही, ग्रीनलैंड पर ट्रंप के दावे ने डेनमार्क और अन्य यूरोपीय शक्तियों को अपनी संप्रभुता के लिए एकजुट होने पर मजबूर कर दिया है।