

UAE Leaves From OPEC and OPEC+: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 28 अप्रैल 2026 को कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देशों के संगठन OPEC और उसके सहयोगी समूह OPEC+ से अलग होने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े तनाव और वैश्विक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा संकट गहराता दिख रहा है। UAE के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल बढ़ने और OPEC की एकजुटता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
करीब 59 साल बाद UAE का इस समूह से अलग होने का फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। इससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में बदलाव और अन्य तेल उत्पादक देशों की रणनीतियों पर असर पड़ सकता है। अब सवाल यह है कि आखिर किन कारणों से UAE ने यह बड़ा कदम उठाया और इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे।
OPEC यानी ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज की स्थापना 1960 में हुई थी। इसके संस्थापक देशों में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला शामिल थे। बाद में UAE 1967 में इसका हिस्सा बना। OPEC का उद्देश्य सदस्य देशों की तेल नीतियों को समन्वित करना है ताकि कीमतों को स्थिर रखा जा सके और उत्पादन को नियंत्रित किया जा सके। यह संगठन वैश्विक तेल उत्पादन का लगभग 30% नियंत्रित करता है। 2016 में OPEC+ बना, जिसमें रूस और अन्य गैर-OPEC देश शामिल हुए, जिससे यह प्रभाव लगभग 40% तक पहुंच गया।
UAE ने कहा है कि यह फैसला उसके राष्ट्रीय हितों और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति के तहत लिया गया है। देश अब अपनी ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अधिक स्वतंत्र भूमिका निभाने पर ध्यान देना चाहता है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में तनाव है, जो दुनिया के तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। UAE ने क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को लेकर खाड़ी देशों के रुख पर भी असंतोष जताया है।
UAE का बाहर निकलना संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह से बिखराव नहीं है। UAE OPEC के प्रमुख उत्पादकों में से एक था और इसके जाने से उत्पादन क्षमता पर असर पड़ सकता है। हालांकि इतिहास में कई देश पहले भी OPEC छोड़ चुके हैं, लेकिन UAE जैसे बड़े खिलाड़ी का जाना संगठन की एकता और सऊदी नेतृत्व पर सवाल जरूर खड़े करता है। अगर आगे और देश भी इसी राह पर चलते हैं, तो OPEC का प्रभाव कमजोर हो सकता है।
OPEC और खासकर सऊदी अरब को उत्पादन नियंत्रण में कठिनाई हो सकती है। तेल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे उनकी आय प्रभावित होगी। वहीं, UAE के स्वतंत्र होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में गिरावट संभव है। मौजूदा समय में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है। इस स्थिति का सबसे बड़ा फायदा उन देशों को मिल सकता है जो तेल आयात पर निर्भर हैं, जैसे भारत, जहां 80% से अधिक तेल आयात किया जाता है।
UAE अब केवल तेल बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अपनी उत्पादन क्षमता को 50 लाख बैरल प्रति दिन तक बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। OPEC में बने रहने का मतलब उत्पादन कटौती के नियमों का पालन करना था, जिससे उसके निवेश पर रिटर्न धीमा पड़ रहा था। ऐसे में अपनी बड़ी निवेश योजनाओं को सफल बनाने के लिए UAE को अधिक स्वतंत्रता की जरूरत महसूस हुई।
UAE के OPEC से अलग होने का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। सबसे पहले, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। OPEC आमतौर पर उत्पादन को नियंत्रित कर कीमतों को संतुलित रखने की कोशिश करता है, लेकिन UAE के अलग होने से यह संतुलन कमजोर पड़ सकता है। इससे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है।
साथ ही, सप्लाई के मोर्चे पर भी असर दिख सकता है। UAE भारत का एक प्रमुख तेल सप्लायर है। अगर वह OPEC की पाबंदियों से बाहर आकर उत्पादन बढ़ाता है, तो भारत को अधिक तेल और बेहतर कीमत मिल सकती है। लेकिन अगर उत्पादन कम होता है या निर्यात नीति बदलती है, तो सप्लाई पर दबाव भी बन सकता है।
इस फैसले से भारत के लिए कुछ अवसर भी पैदा हो सकते हैं। UAE अब द्विपक्षीय समझौतों पर ज्यादा ध्यान दे सकता है, जिससे भारत को सीधे और लचीले शर्तों पर तेल खरीदने का मौका मिल सकता है। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा UAE पर ईरान और रूस की तरह अमेरिकी प्रतिबंध भी नहीं है। ऐसे में भारत UAE से तेल आयात की मात्रा को बढ़ाकर अपनी जरूरत को असानी से पूरा कर सकता है। हालांकि भारत को इस बात पर ध्यान देना होगा कि OPEC से अलग होने के बाद UAE तेल व्यापार को लेकर कैसी नीति अपनाता है। कुल मिलाकर, यह कदम भारत के लिए चुनौती और अवसर दोनों लेकर आ सकता है, जिसका असर लंबे समय तक दिख सकता है।