Iran Peace Deal: समझौते पर फंसा पेच, ईरान ने प्रस्ताव के लिए मांगा समय, ट्रंप का कड़ा रुख

Iran Peace Deal: मध्य पूर्व में ईरान शांति समझौता को लेकर तनाव अभी भी बरकरार है। ईरान ने अपने नए शांति प्रस्ताव को पेश करने के लिए कुछ और समय मांगा है। कूटनीतिक हल की प्रक्रिया काफी धीमी हो गई है।
Iran Peace Deal Delay: Tehran Seeks Time As US Plans Blockade And Tension Grows
मोजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रम्प (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Iran Peace Deal Talks: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस बड़े विवाद में ईरान शांति समझौता वार्ता अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि उसे अपना नया और संशोधित प्रस्ताव पेश करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए। शांति प्रस्ताव पर अंतिम फैसला ईरान के सुप्रीम लीडर द्वारा लिया जाना है जिसके कारण कूटनीतिक प्रक्रिया धीमी पड़ी है। पाकिस्तान सहित कई मध्यस्थ देशों को उम्मीद थी कि ईरान जल्द ही कोई ठोस और नया समाधान लेकर सामने आएगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस दौरे से वापस आकर लगातार वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठकें कर रहे हैं। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की लोकेशन सार्वजनिक नहीं होने के कारण उनसे सीधे संपर्क करना काफी मुश्किल हो रहा है। यह देरी इसलिए भी हो रही है क्योंकि ट्रंप ने पहले युद्ध रोकने और फिर बात करने का प्रस्ताव खारिज किया था। अब ईरान एक ऐसा नया प्रस्ताव बनाने में लगा है जो अमेरिका की शर्तों के करीब हो और काफी संतुलित माना जाए।

ट्रंप का कड़ा रुख

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे विवाद पर अपना कड़ा रुख अपनाते हुए बहुत बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि ईरान इस समय खुद को एक अत्यंत गंभीर संकट की स्थिति में फंसा हुआ बता रहा है। ट्रंप के अनुसार ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द खोलने की लगातार और भारी मांग कर रहा है।

ईरान की सैन्य तैयारी

इन कूटनीतिक कोशिशों के बीच ईरान की सेना ने साफ कहा है कि वह मौजूदा हालात को शांत नहीं मानती। सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि युद्धविराम के बावजूद अमेरिका के साथ अभी भी भरोसे की बहुत कमी है। ईरानी सेना अपने संसाधनों को फिर से मजबूत कर रही है और संभावित लक्ष्यों की अपनी सूची अपडेट कर रही है।

अमेरिका की नई रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अब सीधे तौर पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई करने से पूरी तरह से बच रहा है। अमेरिका लंबी अवधि की नाकेबंदी पर जोर दे रहा है और होरमुज के आसपास अपना भारी दबाव बना रहा है। इसे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे परमाणु समझौते पर झुकाने की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक रणनीति माना जा रहा है।

ओपेक से यूएई बाहर

इस बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच यूएई ने वैश्विक तेल उत्पादक संगठन ओपेक छोड़ने का बहुत बड़ा ऐलान किया है। यूएई के ऊर्जा मंत्री सोहैल मोहम्मद अल-मजरुई ने कहा है कि यह फैसला देश की नई ऊर्जा रणनीति के तहत है। करीब 60 साल बाद इस महत्वपूर्ण संगठन से यूएई का अलग होना ओपेक के लिए एक बड़ा झटका माना गया है।

इजरायल की आक्रामक कार्रवाई

इस पूरे वैश्विक घटनाक्रम में इजरायल भी अब पूरी तरह से सक्रिय और काफी ज्यादा आक्रामक नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह की एक बहुत बड़ी सुरंग पूरी तरह नष्ट की गई है। कुल मिलाकर एक तरफ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं तो दूसरी तरफ लगातार सैन्य और आर्थिक दबाव भी बनाया जा रहा है।

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