अफगानिस्तान में मौत का नया कानून, तालिबान ने शिया समुदाय के लिए दी फांसी की खुली छूट; मचा हड़कंप

Taliban New Law: तालिबान के सुप्रीम लीडर ने नए पीनल कोड को मंजूरी दी है, जिसमें शिया समुदाय और गैर-सुन्नी नेताओं सहित 11 श्रेणियों के लोगों को मौत की सजा देने का क्रूर प्रावधान है।
A new death penalty law in Afghanistan: the Taliban has given free rein to execute members of the Shia community; this has caused widespread panic.
अफगानिस्तान में मौत का नया कानून, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Afghanistan New Law News In Hindi: अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने अपने दमनकारी शिकंजे को और कसते हुए एक नया और खौफनाक कानून लागू किया है। तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने एक नए पीनल कोड को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 11 विभिन्न श्रेणियों के लोगों को मौत की सजा दी जा सकेगी। इस नए कानून के आने से अफगानिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक शिया समुदाय और अन्य गैर-सुन्नी समुदायों के लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है।

इन 11 श्रेणियों के लोगों पर लटकी फांसी की तलवार

नए कानून के आर्टिकल 16 में 'विवेक के आधार पर मौत की सजा' का प्रावधान किया गया है जिसे तकनीकी रूप से 'ताज़ीर बाय डेथ' कहा गया है। इसके तहत तालिबान ने 'साई बिल-फसाद' नाम की एक विशेष श्रेणी बनाई है। फांसी की सजा पाने वालों की सूची में निम्नलिखित लोग शामिल हैं:

  • तालिबान के खिलाफ हथियार उठाने वाले सशस्त्र विरोधी।
  • इस्लाम के खिलाफ झूठे विश्वासों या विचारों का समर्थन करने वाले।
  • गैर-सुन्नी मतों के नेता और शिक्षक (जिन्हें 'मुब्तदी' या नवाचार करने वाला कहा गया है)।
  • जादू-टोना करने के आरोपी।
  • बार-बार अपराध करने वाले व्यक्ति।
  • भ्रष्टाचार में लिप्त लोग (हालांकि कानून में भ्रष्टाचार की परिभाषा स्पष्ट नहीं है)।
  •  हाईवे पर लूटपाट करने वाले लुटेरे।
  • समलैंगिक संबंधों के आरोपी।
  • बार-बार अवैध यौन संबंध बनाने वाले।
  • गला घोंटकर हत्या करने वाले अपराधी।
  • वे लोग जिन्हें तालिबान के अनुसार सुधारा नहीं जा सकता और जो समाज के लिए हानिकारक हैं।

शिया समुदाय पर बढ़ता खतरा

अफगानिस्तान की लगभग 4.4 करोड़ की आबादी में 10% से 15% हिस्सा शिया समुदाय का है। नए कानून में शिया इस्लाम को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं बताई गई है, लेकिन गैर-सुन्नी नेताओं को 'नवाचार' करने वाला बताकर फांसी की श्रेणी में रखने से इस समुदाय में भारी डर व्याप्त है।

अखुंदजादा के पास होगी असीमित शक्ति

इस कानून की सबसे भयावह बात यह है कि किसी भी फांसी या हत्या की अंतिम मंजूरी सिर्फ सुप्रीम लीडर हिबतुल्ला अखुंदजादा ही देंगे। इन सजाओं को अनिवार्य इस्लामी सजाओं के बजाय 'विवेकाधीन' श्रेणी में रखा गया है जिससे तालिबान नेतृत्व को किसी को भी खत्म करने की असीमित शक्ति मिल जाती है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और कानूनी जानकारों ने इस कानून को 'अस्पष्ट और दमनकारी' बताया है। उनका तर्क है कि तालिबान इस कानून का इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोधियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए करेगा। वहीं, आलोचनाओं पर पलटवार करते हुए तालिबान के उच्च शिक्षा मंत्री नेदा मोहम्मद नदीम ने विरोध करने वालों को 'काफिर' करार दिया है। तालिबान ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके कानूनों की आलोचना करना भी एक अपराध माना जाएगा।

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