स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 3 जहाजों पर हमले (सोर्स-सोशल मीडिया)
Attack On Cargo Ships In Hormuz: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे समुद्री रास्ते में बुधवार का दिन व्यापारिक जहाजों के लिए किसी डरावने सपने जैसा साबित हुआ है। अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमलों ने न केवल जहाजों को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच व्यापारिक जहाजों का इस रास्ते से गुजरना अब जान जोखिम में डालने जैसा है। आज की इस बड़ी घटना ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को एक बार फिर से उबाल पर ला दिया है।
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार बुधवार सुबह तीन अलग-अलग जहाजों को निशाना बनाकर प्रोजेक्टाइल हमले किए गए हैं। पहला हमला ओमान के उत्तर में एक कार्गो शिप पर हुआ, जिसके बाद जहाज धधक उठा और क्रू को वहां से सुरक्षित निकाला गया। ईरान ने फिलहाल इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इससे व्यापारिक समुद्री रास्तों पर डर और दहशत का माहौल पैदा हो गया है।
दूसरा हमला सुबह रास अल खैमा के पास एक कंटेनर शिप पर हुआ और तीसरा हमला दुबई के उत्तर-पश्चिम में एक बल्क कैरियर पर हुआ। इन हमलों में जहाजों को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं और पर्यावरण पर कोई असर नहीं हुआ है। नेविगेशन के लिहाज से यह पूरा क्षेत्र अब अत्यंत खतरनाक हो गया है, जिससे जहाजों को वहां से न गुजरने की सख्त सलाह दी गई है।
होर्मुज स्ट्रेट की कुल चौड़ाई केवल 33 किलोमीटर है, लेकिन जहाजों के चलने के लिए सिर्फ 11 किलोमीटर का हिस्सा ही गहरा और सुरक्षित है। इतने संकरा रास्ता होने के कारण यहां जहाजों का धधकना अन्य जहाजों के आवागमन को बहुत मुश्किल बना रहा है और ट्रैफिक ठप है। पिछले 72 घंटों में इस रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए केवल 2 तेल टैंकर ही गुजर पाए हैं, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा है।
इस समुद्री रास्ते से दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस के कारोबार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, जिस पर अब संकट मंडरा रहा है। बाजार में तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं और एलएनजी की सप्लाई प्रभावित होने से गैस की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। मर्स्क जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने ऑपरेशन सस्पेंड कर दिए हैं, जिसका सीधा असर भारत और यूरोप जैसे आयातक देशों की जेब पर पड़ेगा।
यह भी पढ़ें: होर्मुज के बाद अब स्वेज नहर ब्लॉक करने की तैयारी, हूतियों ने दी रॉकेट हमले की धमकी; दुनियाभर में मचा हड़कंप
शिपिंग कंपनियों को अब मजबूरी में अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप वाले लंबे रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है, जो बहुत समय लेने वाला है। इस वैकल्पिक रास्ते से सफर कई हफ्ते लंबा हो जाता है, जिससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है और महंगाई आसमान छूने लगती है। डेढ़ सौ से ज्यादा जहाज वर्तमान में बाहर लंगर डाले खड़े हैं, क्योंकि बीमा कंपनियों ने इस युद्ध क्षेत्र के लिए कवरेज देना बंद कर दिया है।