शेख हसीना, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Sheikh Hasina Retirement: बांग्लादेश की राजनीति में पिछले कई दशकों तक दबदबा रखने वाली पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की नेता शेख हसीना ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का फैसला किया है। उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने वॉशिंगटन से एक इंटरव्यू के दौरान इस बात की पुष्टि की कि उनकी मां अब चुनावों या राजनीति का हिस्सा नहीं रहेंगी। जॉय ने इसे ‘हसीना दौर का अंत’ करार दिया है।
जॉय के अनुसार, शेख हसीना ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल को ही आखिरी टर्म बनाने का मन बना लिया था। उन्होंने यह निर्णय अपनी बढ़ती उम्र के कारण लिया था, लेकिन अगस्त 2024 में हुए छात्र विद्रोह और उसके बाद पैदा हुई अस्थिरता के कारण उन्हें अचानक पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। फिलहाल वे भारत में ही रह रही हैं, हालांकि उनकी इच्छा बांग्लादेश लौटकर ही रिटायर होने की है।
बांग्लादेश में अगले महीने चुनाव होने वाले हैं लेकिन चुनाव आयोग ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे पार्टी इसमें हिस्सा नहीं ले पाएगी। इस पर जॉय का कहना है कि 70 साल पुरानी पार्टी हसीना के बिना भी टिकी रहेगी और उनकी विदाई से लीडरशिप पर फर्क नहीं पड़ेगा।
दूसरी ओर, बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने हसीना को उम्रकैद और मौत की सजा सुनाई है। उन पर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने के गंभीर आरोप हैं, हालांकि उनके बेटे ने इन दावों को गलत बताया है।
भारत और बांग्लादेश के बीच वर्तमान युनूस सरकार के दौरान संबंधों में काफी कड़वाहट आई है। बांग्लादेश लगातार भारत पर शेख हसीना को संरक्षण देने का आरोप लगाता रहा है और उनके प्रत्यार्पण की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हसीना के संन्यास के बाद बांग्लादेश का ‘हस्तक्षेप’ वाला आरोप कमजोर पड़ सकता है जिससे रिश्तों में सुधार की गुंजाइश बढ़ेगी।
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भारत भी आने वाली नई सरकार के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश में है। हाल ही में बीएनपी नेता खालिदा जिया के निधन पर शोक व्यक्त करने विदेश मंत्री एस. जयशंकर बांग्लादेश गए थे जहां उन्होंने तारिक रहमान से मुलाकात की थी। इसे रिश्तों में सुधार की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक पहल माना जा रहा है।