शेख हसीना का खौफ अब भी कायम, कोर्ट में गवाही देने से डर रहे हैं बांग्लादेशी
शेख हसीना के 15 साल के शासनकाल में हुए अत्याचारों के खिलाफ लोग खुलकर सामने आने से डर रहे हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि जो लोग गवाही देने की कोशिश करते हैं, उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
शेख हसीना (फोटो- सोशल मीडिया)
ढाका: बांग्लादेश से शेख हसीना को निकले हुए एक साल होने को है, लेकिन उनका डर अब भी देश की जनता के बीच बना हुआ है। बांग्लादेश में नई सरकार ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, और उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है। हालांकि, उनके 15 साल लंबे कार्यकाल में किए गए अत्याचारों के खिलाफ लोग खुलकर गवाही देने से कतरा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, गवाही देने वालों को जान से मारने की धमकियां भी दी जा रही हैं।
स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, शेख हसीना ने फोन पर वादी, गवाहों, जांच अधिकारियों और मुकदमे से जुड़े अन्य लोगों को जान से मारने और उनके घरों को आग लगाने की धमकी दी। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण अधिनियम, 1973 की धारा 11(4) का उल्लंघन है, क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है। इस मामले में अदालत ने शेख हसीना को 6 महीने की सजा सुनाई है।
भय के कारण गवाही देने से हिचक रहे लोग
मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल ने एक सवाल के जवाब में बताया कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की जांच एजेंसी ने सूचित किया है कि कई गवाह भय के कारण गवाही देने से हिचक रहे हैं। यहां तक कि कुछ लोग तो मामले दर्ज कराने के लिए भी सामने नहीं आ रहे हैं, जिससे न्यायाधिकरण की कार्यवाही बाधित हो रही है।
सम्बंधित ख़बरें
केमिकल नहीं, फिर कैसे बचा रहा 4 महीने तक खामेनेई का शव? जनाजे से पहले सामने आया बड़ा सच
भारत-जापान की मेगा डील! डिफेंस से फार्मा तक हुए बड़े समझौते, जानें इंडो-पैसिफिक में अब कैसे होगा बदलाव?
बातचीत एक तरफ, बदला दूसरी तरफ! ईरान की सीधी चेतावनी- अयातुल्लाह खामेनेई के खून का बदला लेकर ही मानेंगे
कीव पर रूसी हमले में अब तक 13 की मौत, कई इमारतें मलबे में तब्दील; मेट्रो स्टेशनों में कटी लोगों की रात
भारत-अमेरिका में बड़ी डील, पेंटागन ने 10 साल के डिफेंस एग्रीमेंट का किया ऐलान
जांच अधिकारियों को डराया गया
शेख हसीना के खिलाफ बांग्लादेश के विभिन्न थानों और अदालतों में दर्ज 227 मामलों के शिकायतकर्ता अब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में गवाह के रूप में पेश किए गए हैं। इनमें से कई मामलों को न्यायाधिकरण में स्थानांतरित भी कर दिया गया है।
ताजुल ने बताया कि उन्हें भी डराने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कहा कि वे किसी भी दबाव से नहीं डरते और कानून के अनुसार कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इन मामलों में सबसे अहम भूमिका गवाहों की है, जो देश के दूर-दराज के इलाकों से हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी चेताया कि अगर जांच अधिकारियों को डराया गया, तो इससे जांच प्रक्रिया पर असर पड़ेगा। इसी वजह से अदालत की अवमानना की शिकायत दर्ज कराई गई है।
