
पुतिन ज़ेलेंस्की, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Russia Ukraine Peace Talks Abu Dhabi: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से चले आ रहे खूनी संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के आबूधाबी में एक ऐतिहासिक शांति वार्ता हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हो रही इस बैठक में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल एक ही मेज पर मौजूद हैं। लेकिन इस शांति प्रक्रिया के शुरू होने से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन पर एक ऐसा भीषण हमला किया है जिसने बातचीत के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।
यूक्रेनी वायुसेना और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार तड़के रूस ने यूक्रेन के दो सबसे बड़े शहरों कीव और खारकीव को निशाना बनाते हुए भीषण हवाई हमले किए। रूसी सेना ने एक साथ 375 ड्रोन और 21 मिसाइलें दागीं। इस हमले का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन की कमर तोड़ना था, जिसके लिए उसके ऊर्जा संसाधनों को निशाना बनाया गया। इस हमले के कारण राजधानी कीव के एक बड़े हिस्से की बिजली गुल हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस गोलाबारी में 1 व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि कम से कम 23 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
इस हमले के बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबीहा ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जब प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए आबूधाबी में मौजूद हैं तब ऐसा बर्बर हमला करना यह साबित करता है कि पुतिन की जगह किसी बातचीत की मेज पर नहीं बल्कि विशेष कोर्ट के कटघरे में है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी पुतिन की तुलना वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति मादुरो से करते हुए कहा कि अगर अमेरिका मादुरो के साथ कड़ा बर्ताव कर सकता है, तो पुतिन अभी तक आजाद क्यों हैं?
शांति वार्ता की मेज पर बैठने के बावजूद क्रेमलिन के रुख में कोई नरमी नहीं दिख रही है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने स्पष्ट कर दिया है कि रूस इस युद्ध को समाप्त करने के लिए अपनी पुरानी मांगों से पीछे नहीं हटा है। रूस ने डोनबास क्षेत्र (दोनेत्स्क और लुहांस्क) को सौंपने की अपनी मांग को बरकरार रखा है। डोनबास क्षेत्र यूक्रेन के लिए औद्योगिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे छोड़ना यूक्रेन के लिए एक बड़ी हार होगी।
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राष्ट्रपति जेलेंस्की ने आबूधाबी वार्ता को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाते हुए कहा है कि पहले दिन ही किसी बड़े निष्कर्ष पर पहुंचने की सोचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने जोर दिया कि सबसे पहले रूस को यह साबित करना होगा कि वह वास्तव में युद्ध खत्म करने के लिए तैयार है। चार साल में पहली बार दोनों देश एक मंच पर आए तो हैं, लेकिन रूस के ताजा हमलों ने शांति की इन कोशिशों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।






