ईरान की 'आंख' बना रूस! सैटेलाइट डेटा से अमेरिकी युद्धपोतों की लोकेशन हो रही लीक, क्या फंस गए डोनाल्ड ट्रंप?

US Iran War: रूस और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य गठजोड़ ने अमेरिका की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस सैटेलाइट इंटेलिजेंस के जरिए ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों की सटीक लोकेशन साझा कर रहा है।
Russia Becomes Iran's 'Eye'! Satellite Data Leaks Locations of US Warships Has Donald Trump Been Cornered?
क्या रूस कर रहा ईरान की मदद, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Russia Satellite Intelligence Iran US Warships: मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर किए जा रहे सटीक हमलों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। अब यह खुलासा हुआ है कि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन के अचूक निशाने के पीछे रूस का हाथ है। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस इस युद्ध में ईरान की 'आंख' बनकर काम कर रहा है और उसे संवेदनशील सैन्य जानकारी उपलब्ध करा रहा है।

अमेरिकी युद्धपोत और विमान अब निशाने पर

'वॉशिंगटन पोस्ट' की एक हालिया रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य विमानों की सटीक लोकेशन दे रहा है। इस सैटेलाइट इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग की मदद से ईरान खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और समुद्र में तैनात बेड़ों पर घातक हमले कर रहा है। यह सैन्य सहयोग ऐसे समय में हो रहा है जब आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट डेटा और रीयल-टाइम ट्रैकिंग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है।

रूस और ईरान का 'एहसान' वाला गणित

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और ईरान के बीच यह रक्षा सहयोग 'लेन-देन' पर आधारित है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध काफी मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान जब रूस को हथियारों की जरूरत थी, तब ईरान ने उसे बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलें प्रदान की थीं। अब जब ईरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सीधा मोर्चा खोले हुए है, तो रूस अपना 'एहसान' लौटा रहा है। हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत में किसी भी तरह के सीधे सहयोग से इनकार किया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

यूक्रेन से मदद मांगने को मजबूर हुआ अमेरिका

ईरानी हमलों की सटीकता ने अमेरिका और उसके मित्र देशों को संकट में डाल दिया है। हालात यह हैं कि अमेरिका और खाड़ी देश अब ड्रोन इंटरसेप्शन तकनीक के लिए यूक्रेन की ओर देख रहे हैं। यूक्रेन ने रूसी ड्रोन के खिलाफ युद्ध का लंबा अनुभव हासिल किया है, और अब अमेरिका उस अनुभव का उपयोग ईरान के खिलाफ करना चाहता है। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे वैश्विक युद्ध के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

चीन का सावधानी भरा रुख

रूस जहां खुलकर ईरान की मदद करता दिख रहा है, वहीं चीन इस मामले में काफी संतुलित और सावधान है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, चीन ईरान को आर्थिक सहायता, स्पेयर पार्ट्स और मिसाइल उपकरण देने पर विचार कर रहा है, लेकिन वह सीधे सैन्य टकराव से बच रहा है। इसका मुख्य कारण चीन की ईरानी तेल पर निर्भरता और होर्मुज जलडमरूमध्य में होने वाली किसी भी बड़ी बाधा की आशंका है, जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है।

ईरान का खुला दावा

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें रूस और चीन से सैन्य सहयोग मिल रहा है। यह खुलासा इस बात की तस्दीक करता है कि अमेरिका के खिलाफ एक नया वैश्विक मोर्चा तैयार हो रहा है, जिसमें रूस और ईरान मुख्य खिलाड़ी बनकर उभरे हैं।

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