अमेरिका के खिलाफ जंग में कूदे रूस और चीन! ईरानी विदेश मंत्री अराघची का दावा, युद्ध में मिल रही है सैन्य मदद

US-Iran War: ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध में रूस और चीन से सैन्य सहयोग मिलने का दावा किया। अराघची ने बातचीत से इनकार करते हुए हर्जाने, हमलों की गारंटी और क्षेत्रीय जांच समिति की मांग की।
Russia-China Military Support Iran
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Russia-China Military Support Iran to War Against US: मिडिल ईस्ट में पिछले दो हफ्तों से जारी युद्ध के बीच, ईरान ने बड़ा दावा किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इस संघर्ष में उन्हें रूस और चीन से सैन्य सहयोग मिल रहा है। अराघची ने दोनों देशों को अपना “रणनीतिक साझेदार” बताया और कहा कि ईरान का इनके साथ राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य स्तर पर मजबूत संबंध है। उन्होंने हालांकि किसी विशेष विवरण का खुलासा नहीं किया।

 इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि उन्हें संदेह है कि रूस युद्ध में ईरान को कुछ मदद दे रहा हो सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि रूस शायद यह मानता है कि अमेरिका यूक्रेन की मदद कर रहा है। इस बयान के पीछे कुछ रिपोर्ट्स थीं जिनमें दावा किया गया कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी दे रहा है।

अमेरिका से बातचीत की संभावना नहीं

अब्बास अराघची ने कहा कि युद्ध का अंत तभी संभव है जब हमलों को दोबारा न दोहराए जाने की पुख्ता गारंटी दी जाए। उन्होंने क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाने का प्रस्ताव रखा, जो क्षेत्र में हुए हमलों की जाँच कर सके। इसके अलावा, युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए हर्जाने या मुआवजे की भी मांग की गई।

अराघची ने कहा कि ईरान की सैन्य कार्रवाइयां केवल अमेरिकी ठिकानों और हितों तक सीमित रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पड़ोसी देशों के नागरिक या आवासीय क्षेत्रों को निशाना नहीं बनाया गया। अराघची ने यह भी आशंका जताई कि कुछ हमलों के पीछे इजरायल हो सकता है, जिसका मकसद ईरान और पड़ोसी अरब देशों के संबंधों में दरार डालना है।

अमेरिका के नए ड्रोन का आरोप

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के “शाहिद” जैसे ही एक नया ड्रोन “लुकास” बनाया है, जिसका उपयोग अरब देशों में ठिकानों पर हमले के लिए किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के ऊर्जा केंद्रों या तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया, तो ईरान अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों पर सीधे हमला करने से पीछे नहीं हटेगा।