ईरान-अमेरिका के बीच ‘शांति दूत’ बना रूस; पुतिन के नए ‘न्यूक्लियर प्लान’ ने पलटी बाजी, क्या थमेगी जंग?
Russia Nuclear Mediation: रूस ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन विवाद को सुलझाने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। विदेश मंत्री लावरोव ने संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित फ्यूल में बदलने की पेशकश की है।
- Written By: अमन उपाध्याय
व्लादिमीर पुतिन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Russia Nuclear Mediation Iran US: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए रूस एक बार फिर ‘शांति दूत’ की भूमिका में सामने आया है। रूस ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन स्टॉक से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए एक नया और रणनीतिक ऑफर दिया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक और दौर की शांति वार्ता होने की संभावना जताई जा रही है।
रूस का ‘न्यूक्लियर ऑफर’
रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘तास’ के अनुसार, विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्पष्ट किया है कि रूस, ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को ‘फ्यूल ग्रेड’ या सुरक्षित स्टोरेज सामग्री में बदलने में मदद कर सकता है। लावरोव ने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया ईरान के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन के अधिकार का उल्लंघन किए बिना पूरी की जाएगी।
रूस का यह रुख तेहरान के उस लंबे समय से चले आ रहे दावे का समर्थन करता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल बिजली उत्पादन और शांतिपूर्ण जरूरतों के लिए है। लावरोव ने यह भी कहा कि शांति वार्ता के दौरान ईरान जो भी फैसला लेगा, रूस उसका पूरी तरह सम्मान करेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, यह प्रस्ताव काफी समय से लंबित था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसकी अहमियत बढ़ गई है।
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ट्रंप की ‘नो कॉम्प्रोमाइज’ पॉलिसी
हालांकि, रूस की इस मध्यस्थता के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें यूरेनियम संवर्धन पर केवल रोक (Freeze) लगाने का विचार पसंद नहीं है, बल्कि वे इस पूरे प्रोग्राम को पूरी तरह से समाप्त (Complete Halt) करना चाहते हैं। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम वर्तमान में मलबे के नीचे या गुप्त ठिकानों में छिपा हो सकता है, जो एक बड़ा सुरक्षा खतरा है।
क्या था 2015 का समझौता?
यह पहली बार नहीं है जब रूस ने इस तरह की तकनीकी मदद की पेशकश की है। इससे पहले 2015 में ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ (JCPOA) के तहत भी रूस ने ईरान के अतिरिक्त संवर्धित यूरेनियम को हटाने और उसे शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा में बदलने में मदद की थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपना अतिरिक्त स्टॉक रूस को स्थानांतरित कर दिया था।
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ऊर्जा संकट और चीन का कनेक्शन
रूस की यह पहल केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं है। लावरोव ने चीन के दौरे पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद संकेत दिया कि रूस उन देशों की ऊर्जा जरूरतों को भी पूरा कर रहा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की वजह से आपूर्ति संकट का सामना कर रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रूस का यह नया ‘न्यूक्लियर प्लान’ अमेरिका और ईरान को युद्ध के मुहाने से वापस ला पाएगा।
