सिचुएशन रूम में 2 घंटे चली ट्रंप की बैठक; व्हाइट हाउस ने ईरान के लिए खींची ‘रेड लाइन’, अब क्या होगा?
Trump Situation Room Meeting: व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति ट्रंप और सुरक्षा टीम के बीच दो घंटे चली अहम बैठक के बावजूद ईरान के साथ पीस डील पर कोई घोषणा नहीं हुई।
- Written By: अमन उपाध्याय
डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Donald Trump Situation Room Meeting Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में पूरी दुनिया की निगाहें व्हाइट हाउस पर टिकी थीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ ‘सिचुएशन रूम’ में करीब दो घंटे तक लंबी बैठक की।
कयास लगाए जा रहे थे कि इस बैठक के बाद किसी बड़े शांति समझौते का ऐलान होगा, लेकिन ट्रंप ने बिना किसी आधिकारिक घोषणा के बैठक समाप्त कर दी।
ट्रंप की ‘रेड लाइन’
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल किसी भी समझौते की घोषणा करने की जल्दबाजी में नहीं हैं। वे तभी आगे बढ़ेंगे जब उन्हें लगेगा कि उनके द्वारा तय की गई ‘रेड लाइन’ शर्तें पूरी तरह से मानी जा रही हैं।
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ट्रंप की सबसे बड़ी और प्राथमिक शर्त यह है कि ईरान के पास किसी भी स्थिति में न्यूक्लियर हथियार नहीं होने चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ईरान को यह स्वीकार करना होगा कि वे कभी भी परमाणु हथियार या बम नहीं रखेंगे।
प्रस्तावित डील का भविष्य
इससे पहले कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार एक अस्थायी समझौते पर सहमत हो गए हैं। इस प्रस्तावित समझौते के तहत युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी। हालांकि, सिचुएशन रूम की इस गुप्त बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि ट्रंप प्रशासन अभी भी तेहरान की ओर से ठोस प्रतिबद्धताओं का इंतजार कर रहा है।
समुद्री सुरक्षा और होर्मुज का पेंच
शांति समझौते के लिए ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण मांग अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखी है। उन्होंने कहा है कि Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए फिर से पूरी तरह खोला जाना चाहिए। ट्रंप के अनुसार, इस रणनीतिक जलमार्ग में बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को तुरंत नष्ट किया जाना चाहिए ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार निर्बाध रूप से चल सके।
मिसाइलों से मिलता है जवाब
दूसरी ओर, ईरान ने इस पूरी प्रक्रिया पर गहरा अविश्वास जताया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें केवल ‘गारंटी या शब्दों’ पर भरोसा नहीं है, बल्कि वे अमेरिका की ओर से ठोस कदमों की उम्मीद करते हैं।
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गालिबाफ ने याद दिलाया कि पिछले एक साल में परमाणु वार्ता के दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर दो बार हमले किए हैं, जिससे अविश्वास की खाई और गहरी हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमें बातचीत से नहीं बल्कि मिसाइलों से जवाब मिलता है, इसलिए दूसरी तरफ से ठोस कार्रवाई किए जाने से पहले हम कोई कदम नहीं उठाएंगे।
