ट्रंप ने पीछे खींचे कदम! 48 घंटे में ही हटानी पड़ी होर्मुज की नाकाबंदी; चीन के साथ 'डील' ने पलटी बाजी

Trump Lifts Strait Of Hormuz: ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से नाकाबंदी हटाने की घोषणा की है। चीन द्वारा ईरान को हथियार न देने के वादे और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया।
Trump Backs Down! Blockade of Hormuz Lifted Within Just 48 Hours; 'Deal' with China Turns the Tables
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Trump Lifts Strait Of Hormuz China Agreement: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा यू-टर्न लेते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से समुद्री नाकाबंदी हटाने का ऐलान किया है। महज 48 घंटे पहले शुरू की गई इस सख्त सैन्य घेराबंदी को समाप्त करते हुए ट्रंप ने कहा कि अब यह रणनीतिक जलमार्ग सभी देशों के लिए पूरी तरह खुला है।

सोमवार, 13 अप्रैल को अमेरिका ने इस मार्ग को ब्लॉक करने के लिए करीब 10 हजार सैनिकों की तैनाती की थी लेकिन अब इसे हमेशा के लिए खोलने का फैसला किया गया है।

चीन के साथ 'डील'

इस अचानक हुए बदलाव के पीछे चीन के साथ हुआ एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समझौता बताया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उनकी इस मुद्दे पर चीन से बात हुई है। चीन ने आश्वासन दिया है कि वह ईरान को किसी भी प्रकार के हथियार की आपूर्ति नहीं करेगा। ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को इस संबंध में एक पत्र लिखा था जिस पर वे सहमत हो गए हैं। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि उनके चीन दौरे के दौरान जिनपिंग उनका स्वागत करेंगे क्योंकि दोनों नेताओं के बीच संबंध काफी बेहतर हैं।

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ट्रंप ट्रुथ पोस्ट

क्यों फेल हुई अमेरिका की नाकाबंदी?

रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के पीछे जमीनी हकीकत भी एक बड़ी वजह रही है। 'वॉल स्ट्रीट जनरल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नाकाबंदी पहले ही दिन विफल साबित हुई थी। बताया गया कि नाकाबंदी के बावजूद करीब 20 जहाज अमेरिकी सैनिकों को चकमा देकर होर्मुज से गुजरने में सफल रहे। इनमें से अधिकांश जहाज चीन के थे जिन्हें रोकना अमेरिका के लिए एक बड़ा जोखिम हो सकता था, क्योंकि बीजिंग ने पहले ही इस पर सख्त चेतावनी जारी कर दी थी।

यूरोपीय देशों का बढ़ता दबाव

अमेरिका को केवल चीन ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों ब्रिटेन और फ्रांस के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा था। फ्रांस ने स्पष्ट कर दिया था कि जंग लड़ने वाले देश पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को इस तरह परेशान नहीं कर सकते। ये दोनों देश होर्मुज को खुला रखने के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की तैयारी कर रहे थे जिससे अमेरिका के सैन्य अभियान पर सवाल खड़े होने लगे थे।

इस्लामाबाद शांति वार्ता पर नजर

एक और महत्वपूर्ण कारण इस हफ्ते के आखिर में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली पीस डील मीटिंग है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित इस उच्च स्तरीय बैठक से पहले ट्रंप अपनी स्थिति कमजोर नहीं करना चाहते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नाकाबंदी फेल होती रहती तो बातचीत की मेज पर अमेरिका का पलड़ा हल्का पड़ सकता था। अब नाकाबंदी हटाकर ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाली वार्ता के लिए एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की है।

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