2 लाख लोग अंधेरे में! रूस ने यूक्रेन में बोला बड़ा ड्रोन अटैक, मचाई भारी तबाही
Russia Ukraine War: इस्तांबुल में होने वाली अहम वार्ता से पहले रूस ने यूक्रेन के सुमी क्षेत्र में एक प्रमुख पावर स्टेशन पर ड्रोन से हमला कर दिया, जिससे करीब दो लाख लोग बिजली कटौती के चलते अंधेरे में..
- Written By: अमन उपाध्याय
रूस ने इस्तांबुल वार्ता से पहले बोला बड़ा हमला, (डिजाइन फोटो)
कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन साल से अधिक समय गुजरने के बीच 23 जुलाई को इस्तांबुल में एक महत्वपूर्ण वार्ता होने जा रही है। मगर इस बैठक से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन के सुमी क्षेत्र में एक पावर स्टेशन पर ड्रोन से बड़ा हमला कर दिया, जिससे करीब 2.2 लाख लोग बिजली कटौती के कारण अंधेरे में डूब गए हैं। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि अधिकांश इलाकों में बिजली आपूर्ति दोबारा बहाल कर दी गई है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के प्रतिनिधि इस्तांबुल में आमने-सामने बातचीत करने वाले हैं। मई और जून में हुई पिछली बैठकों में केवल कैदियों और मारे गए सैनिकों के शवों के आदान-प्रदान पर ही सहमति बन पाई थी।
वार्ता से पहले रूस का बड़ा हमला
रूस ने इस बार होने वाली वार्ता को लेकर अधिक उम्मीदें नहीं जताई हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है, “इस प्रक्रिया में कोई आसान रास्ता नहीं है, यह वार्ता बेहद कठिन साबित होगी।” रूसी प्रतिनिधिमंडल मंगलवार दोपहर इस्तांबुल पहुंच चुका है, जबकि यूक्रेन के प्रतिनिधि पहले ही अंकारा में तुर्की अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं।
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इन दो अहम मुद्दों पर होगी बातचीत
यूक्रेन की तरफ से इस बातचीत में दो अहम मुद्दे उठाए गए हैं एक, युद्धबंदियों की रिहाई और दूसरा, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच संभावित मुलाकात की तैयारी। यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य का कहना है कि अगर रूस धमकी भरी भाषा छोड़कर सकारात्मक और सहयोगी रवैया अपनाता है, तभी इस वार्ता से किसी ठोस परिणाम की आशा की जा सकती है।
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रूस को सख्त आर्थिक प्रतिबंधों का करना पड़ेगा सामना
रूस का मानना है कि ज़ेलेंस्की और पुतिन की संभावित मुलाकात से पहले कई दौर की बातचीत और व्यापक तैयारी अनिवार्य है। गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच आखिरी बार 2019 में आमने-सामने बातचीत हुई थी। उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही रूस को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर अगले 50 दिनों में युद्ध नहीं थमा, तो रूस को सख्त आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, अब तक क्रेमलिन की ओर से कोई लचीला रुख देखने को नहीं मिला है।
