इस देश को 14 हजार करोड़ के हथियार बेचना चाहता था पाकिस्तान, सऊदी अरब ने ऐसे रोका रास्ता
Pakistan Sudan Weapons Sale: सूडान के भीषण मानवीय संकट के बीच पाकिस्तान द्वारा 14,000 करोड़ रुपये के हथियार बेचने की गुप्त योजना विफल हो गई है। सऊदी अरब ने इस सौदे की फंडिंग से हाथ खींच लिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
पाकिस्तान-सूडान हथियार बिक्री रद्द, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Sudan Weapons Sale Cancelled: आर्थिक तंगी से जूझ रहा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान एक तरफ दुनिया से कर्ज की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह युद्धग्रस्त क्षेत्रों में हथियार बेचकर अपनी तिजोरी भरने की फिराक में था। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान चुपके से उत्तर अफ्रीकी देश सूडान को 14 हजार करोड़ रुपये (लगभग 1.7 बिलियन डॉलर) से अधिक के हथियार और फाइटर जेट बेचने की योजना बना रहा था। हालांकि, पाकिस्तान के इन मंसूबों पर उसके सबसे करीबी सहयोगी सऊदी अरब ने पानी फेर दिया है।
संकट के बीच पाकिस्तान की ‘डील’
सूडान इस समय दुनिया के सबसे भयावह मानवीय संकट से गुजर रहा है। पिछले लगभग तीन वर्षों से सूडान की आधिकारिक सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच खूनी संघर्ष जारी है। इस गृहयुद्ध ने न केवल लाखों लोगों को विस्थापित किया है बल्कि देश को भुखमरी की कगार पर खड़ा कर दिया है।
ऐसी स्थिति में पाकिस्तान ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की और भारी मात्रा में सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति का सौदा तैयार किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह डील अंतिम चरण में थी लेकिन सऊदी अरब के हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तान को इसे मजबूरन रोकना पड़ा है।
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सऊदी अरब का ‘यू-टर्न’
दिलचस्प बात यह है कि इस सौदे को शुरुआत में सऊदी अरब ने ही आगे बढ़ाया था। लेकिन बाद में रियाद ने न केवल सौदे को खत्म करने का निर्देश दिया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि वह इस खरीद के लिए वित्तीय मदद (फंडिंग) नहीं देगा। सूत्रों के अनुसार, कुछ पश्चिमी देशों ने सऊदी अरब को सलाह दी थी कि वह अफ्रीका में होने वाले किसी भी तरह के ‘प्रॉक्सी युद्ध’ का हिस्सा न बने।
सऊदी अरब सूडान की सेना का समर्थन करता रहा है जबकि उसके क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी यूएई (UAE) पर RSF को रसद पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव और रणनीतिक जटिलताओं को देखते हुए सऊदी ने इस सैन्य सौदे से हाथ खींचना ही बेहतर समझा।
पाकिस्तान के लिए दोहरा झटका
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर के लिए यह एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान की कंगाली की हालत यह है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए पूरी तरह से सऊदी अरब के कर्ज और आर्थिक मदद पर निर्भर है।
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पिछले साल ही दोनों देशों ने एक रक्षा समझौता किया था जिसके तहत एक-दूसरे पर हमले को साझा हमला मानने की बात कही गई थी। ऐसे में सऊदी के आदेश को टालना पाकिस्तान के लिए मुमकिन नहीं था। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पाकिस्तान की विदेश और रक्षा नीति किस कदर विदेशी फंडिंग और दबाव के अधीन है।
