सत्ता पर खून के धब्बे! लियाकत अली, भुट्टो से लेकर इमरान तक... जानें PAK में कौन-कौन बना निशाना?

Pakistan PM Murder History: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हत्या की अफवाह ने पूरे पाकिस्तान में सनसनी फैला दी। हालांकि बाद में साफ हुआ कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। । इस घटना ने एक बार...
Blood stains on power! From Liaquat Ali, Bhutto to Imran... Find out who was targeted in Pakistan?
भुट्टो से लेकर इमरान तक, (डिजाइन फोटो)
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Pakistan PM Assassination History: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हत्या की झूठी अफवाह ने देशभर में बवाल मचा दिया। सोशल मीडिया पर यह खबर आग की तरह फैली कि इमरान खान की अदियाला जेल में हत्या कर दी गई है।

हालांकि पाकिस्तान सरकार और जेल प्रशासन ने तुरंत जानकारी दी कि यह खबर पूरी तरह फर्जी है और इमरान खान सुरक्षित हैं। इमरान पिछले लंबे समय से रावलपिंडी की अदियाला जेल में 14 साल की सजा काट रहे हैं।

इमरान खान पर हमला

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर दावे, झूठी खबरें या जानलेवा हमले हुए हों। साल 2022 में भी इमरान खान पर एक बड़ा हमला हुआ था, जब वे एक रैली के दौरान लोगों को संबोधित कर रहे थे। हमले में वे बाल-बाल बचे, लेकिन इससे पाकिस्तान की राजनीतिक हिंसा की सच्चाई एक बार फिर उजागर हुई।

कार्यकाल पूरा न कर पाना पाकिस्तान की पुरानी कहानी

पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मीर ने एक बार टिप्पणी की थी कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री जेल जाने वाले पहले इमरान खान नहीं हैं और न ही वे आखिरी होंगे। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के इतिहास में आज तक कोई भी प्रधानमंत्री अपना पूर्ण पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। दूसरी तरफ, देश के चार सैन्य तानाशाह अय्यूब खान, याह्या खान, जियाउल हक और परवेज मुशर्रफ कभी भी अपने तख्तापलट या संविधान तोड़ने के लिए न्याय का सामना नहीं कर पाए।

हुसैन शहीद सुहरावर्दी से शुरूआत

पाकिस्तान के इस अंधेरे इतिहास की शुरुआत होती है हुसैन शहीद सुहरावर्दी से, जिन्हें 1962 में फर्जी आरोपों में जेल भेज दिया गया था। उनका असली ‘अपराध’ ये था कि उन्होंने जनरल अयूब खान का समर्थन करने से इनकार कर दिया था। बाद में वह लेबनान चले गए, जहां 1963 में उनकी मौत हो गई।

पाकिस्तान के पहले PM भी हुए शिकार

पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की 1951 में रावलपिंडी में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे लोगों को संबोधित कर रहे थे, तभी अचानक फायरिंग हुई और कुछ घंटों में उनकी मौत हो गई।

जुल्फिकार अली भुट्टो को दी गई फांसी

साल 1979 की एक सुबह रावलपिंडी जेल में 51 वर्षीय पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दे दी गई थी। उस समय उनकी बेटी बेनजीर जेल के बाहर खड़ी होकर लगातार विरोध कर रही थीं, मगर उन्हें अपने पिता से मिलने की इजाज़त नहीं दी गई थी। आज इमरान खान के मामले में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है किसी को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा।

Zulfikar Bhutto
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो

अब पाकिस्तान में हालात इस कदर बदल चुके हैं कि आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने संविधान में बदलाव करवाकर अपने हाथों में बेहद व्यापक शक्तियाँ ले ली हैं। तीनों सेनाएं अब सीधे उनके नियंत्रण में हैं और नए प्रावधानों के चलते उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाना भी लगभग असंभव हो गया है।

1979 में भी सैन्य शासन था, जब जनरल जिया-उल-हक सत्ता में थे। उन्होंने भुट्टो को जिस जेल में फांसी दी थी, उसे बाद में तुड़वा दिया ताकि वहाँ उनके नाम पर कोई स्मारक ना बन सके। उसी स्थान पर नई जेल बनाई गईऔर आज वही अडियाला जेल है, जहां इमरान खान बंद हैं।

बेनजीर भुट्टो की गोली मारकर हत्या

27 दिसंबर 2007 को बेनजीर भुट्टो की रावलपिंडी में एक चुनावी रैली के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावर ने खुद को भी उड़ा लिया। बेनजीर दो बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रहीं और पाकिस्तान की राजनीति में उनका गहरा प्रभाव था।

अहसान इकबाल पर हमला

पूर्व गृह मंत्री अहसान इकबाल पर भी पंजाब में रैली के दौरान गोली चलाई गई। वह बच गए, लेकिन यह घटना बताती है कि पाकिस्तान में राजनीतिक व्यक्तित्व कितने असुरक्षित रहते हैं।

इतिहास की इन घटनाओं को देखकर लगता है कि पाकिस्तान की राजनीति हमेशा से ही अनिश्चितता, हिंसा और अस्थिरता से घिरी रही है। इमरान खान की मौत की अफवाह भले ही झूठी हो, लेकिन इसने एक बार फिर उस देश के खौफनाक राजनीतिक इतिहास को उजागर कर दिया है, जहां लोकतांत्रिक नेताओं की सुरक्षा अब भी बड़ा सवाल बनी हुई है।

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