कतर की ईरान को दो टूक चेतावनी: कहा- सभी सीमाएं लांघी, अब खाड़ी देश भी जंग में कूदने को तैयार

Iran Attacks Gulf: कतर ने ईरान के हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि उसने सभी सीमाएं लांघ दी हैं। संप्रभुता पर हमलों के बाद अब खाड़ी देश जवाबी कार्रवाई के सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
Qatar Warns Iran as Conflict Escalates: All Lines Crossed, Gulf Nations Ready to Respond
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Middle East War Escalation: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने अब एक नया और बहुत ही खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों ने अरब जगत को हिला दिया है। कतर ने ईरान की इन हरकतों को बर्दाश्त से बाहर बताते हुए अब सीधी और कड़ी चेतावनी दी है। मध्य पूर्व युद्ध में वृद्धि के इस दौर में अब अंदेशा है कि खाड़ी देश भी जंग में शामिल हो सकते हैं।

कतर का गुस्सा और संप्रभुता का सवाल

कतर के विदेश मंत्रालय ने बहुत ही सख्त लहजे में कहा है कि ईरान की कार्रवाई अब असहनीय हो चुकी है। प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने स्पष्ट किया कि उनके रिहायशी इलाकों और इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी संप्रभुता पर हो रहे ये हमले बिना किसी ठोस जवाब के अब और नहीं रह सकते।

खाड़ी देशों की सुरक्षा और आर्थिक संकट

ईरान की मिसाइलों और ड्रोन्स ने पर्यटन और व्यापार के लिए मशहूर खाड़ी देशों की छवि को नुकसान पहुंचाया है। दुबई के जेबेल अली बंदरगाह जैसे केंद्रों पर हमले होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है। ईरान चाहता है कि अरब देश अमेरिका पर दबाव बनाएं, लेकिन यह रणनीति उसे अमेरिका के और भी करीब धकेल रही है।

अरब जगत की एकजुटता और आपात बैठक

इस संकट के बीच गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के छह सदस्य देशों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण आपात बैठक बुलाई है। सऊदी अरब, कुवैत और ओमान जैसे देशों ने मिलकर अपनी सुरक्षा और स्थिरता की रक्षा करने का साझा संकल्प लिया है। इन देशों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी तरह की आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

कूटनीति की अपील और युद्ध का खतरा

यूएई के वरिष्ठ सलाहकार अनवर गार्गश ने ईरान से अपील की है कि वह जिम्मेदारी दिखाए और अपने पड़ोसियों को न उकसाए। उन्होंने कहा कि ईरान का युद्ध उसके पड़ोसियों के साथ नहीं है, इसलिए उसे अलगाव बढ़ने से पहले समझदारी दिखानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जंग लंबी खिंची, तो खाड़ी देश भी न चाहते हुए भी इस फ्रंटलाइन पर आ जाएंगे।

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