पाकिस्तान में 'फेफड़ों' पर चली कुल्हाड़ी! सेहत का हवाला देकर काटे 29,000 पेड़, संसद में भारी बवाल

Pakistan Tree Cutting: इस्लामाबाद में 29,000 से अधिक पेड़ों को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताकर काट दिया गया है। विपक्ष ने सरकार पर शहर को पर्यावरण विनाश की ओर धकेलने का आरोप लगाया है।
In Pakistan, the "lungs" of the country have been attacked! 29,000 trees were cut down citing health reasons, sparking a major uproar in parliament.
पाकिस्तान में काटे गए हजारों पेड़, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
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Pakistan News In Hindi: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद अपनी हरियाली के लिए जानी जाती है लेकिन हाल ही में यहां 29,000 से अधिक पेड़ों की कटाई ने एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद पैदा कर दिया है। सरकार का तर्क है कि ये पेड़ नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन रहे थे जबकि विपक्ष इसे राजधानी के 'फेफड़ों' की हत्या करार दे रहा है।

संसद में गूंजा पेड़ों की कटाई का मुद्दा

मंगलवार को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में यह मुद्दा उस समय गरमाया जब गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने संसद को जानकारी दी कि इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (ICT) क्षेत्र से कुल 29,115 पेड़ हटाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेहत की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। चौधरी ने आश्वासन दिया कि आने वाले महीनों में इन पेड़ों की भरपाई के लिए बड़े पैमाने पर नए पौधे लगाए जाएंगे।

विपक्ष का 60 साल पुराने पेड़ों पर सवाल

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेता अली मुहम्मद खान और पीपीपी की शाजिया मरी ने इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। अली मुहम्मद खान ने सरकार को घेरते हुए कहा कि ये पेड़ इस्लामाबाद के 'फेफड़े' थे और इन्हें काटकर शहर की हवा को बीमार बना दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केवल 'पेपर मलबेरी' जैसी एलर्जी पैदा करने वाली प्रजाति को हटाना था, तो प्रशासन ने 50 से 60 साल पुराने पेड़ों को क्यों काट दिया? खान का मानना है कि यदि जनता और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भरोसे में लिया जाता, तो इतना अविश्वास पैदा नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और स्वास्थ्य का तर्क

जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 2023 और 2025 के आदेशों के तहत की गई है। मंत्री के अनुसार, काटे गए अधिकांश पेड़ 'पेपर मलबेरी' प्रजाति के थे, जो बड़े पैमाने पर एलर्जी और अन्य श्वसन समस्याओं का कारण बन रहे थे। उनके दावे के अनुसार, इन पेड़ों की वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही थी जिससे इन्हें हटाना अनिवार्य हो गया था।

जनता में आक्रोश और सोशल मीडिया पर विरोध

सिर्फ संसद ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों में भी इस फैसले को लेकर भारी नाराजगी है। बड़ी संख्या में लोगों ने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ सड़कों और सोशल मीडिया पर अपना विरोध दर्ज कराया है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने से शहर के तापमान और वायु गुणवत्ता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

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