

Mohsin Naqvi Car Checking London : पाकिस्तान को लेकर दुनिया की धारणा कैसी है, इसका ताज़ा उदाहरण ब्रिटेन में देखने को मिला। लंदन दौरे पर पहुंचे पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी की गाड़ी को ब्रिटिश पुलिस ने अचानक रोका और उसकी गहन तलाशी ली।
यह जांच इतनी सख्त थी कि इसे किसी भी तरह की ‘रूटीन चेकिंग’ नहीं कहा जा सकता। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पाकिस्तान की वैश्विक छवि पर फिर से बहस शुरू हो गई है।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ब्रिटिश पुलिस अधिकारी हर दिशा से नकवी की कार की जांच कर रहे हैं। कार के हर हिस्से की बारीकी से चेकिंग की गई। इस दौरान न तो किसी वीआईपी प्रोटोकॉल का पालन होता दिखा और न ही गृहमंत्री होने के नाते नकवी को कोई विशेष छूट मिली। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की साख और भरोसे के स्तर को बताने के लिए काफी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब मोहसिन नकवी ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय में अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे। नकवी फरवरी 2024 से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन भी हैं। इससे पहले वे जनवरी 2023 से फरवरी 2024 तक पंजाब के कार्यवाहक मुख्यमंत्री और उससे पहले मीडिया उद्योग से जुड़े रहे हैं।
ब्रिटेन में इस तरह की कठोर जांच आमतौर पर उन देशों के प्रतिनिधियों पर की जाती है, जिनके नागरिकों और नेताओं पर सुरक्षा व विश्वसनीयता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेह रहता है। नकवी के मामले में भी यही साफ दिखाई देता है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी पाकिस्तानी नेता या अधिकारी के साथ विदेश में ऐसा व्यवहार हुआ हो। पाकिस्तानियों की ‘इमेज क्राइसिस’ एक लंबे समय से जारी मुद्दा है।
• कुछ समय पहले ही एक पाकिस्तानी सांसद ने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को सार्वजनिक रूप से ‘सेल्समैन’ कहकर विवाद खड़ा कर दिया था।
• वहीं मार्च 2024 में तुर्कमेनिस्तान में तैनात पाकिस्तान के राजदूत अहसान वगान को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी और उन्हें एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया था।
ये घटनाएं बताती हैं कि पाकिस्तान न सिर्फ आंतरिक अस्थिरता बल्कि बाहरी दुनिया में अविश्वास के गंभीर संकट से जूझ रहा है। दुनिया के कई देशों में पाकिस्तानी नेताओं, राजनयिकों और आम नागरिकों पर भरोसा कम होता जा रहा है।
ब्रिटेन में मोहसिन नकवी के साथ हुई घटना इसी सिलसिले का हिस्सा मानी जा रही है और पाकिस्तान की पहले से कमजोर वैश्विक छवि पर नया सवाल खड़ा करती है।