पश्चिम एशिया संकट पर जयशंकर का ग्लोबल आउटरीच, फ्रांस से ईरान तक 24 घंटे में ताबड़तोड़ फोन; जानें क्या हुई बात?

S Jaishankar Diplomacy: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। एस जयशंकर ने फ्रांस, ईरान और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा की है।
Jaishankar's global outreach on the West Asia crisis, a flurry of calls from France to Iran in 24 hours; find out what transpired?
विदेश मंत्री एस जयशंकर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

West Asia Conflict: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता तेज कर दी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने वैश्विक स्तर पर संवाद और समन्वय बढ़ाने की पहल की है। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले 24 घंटों के भीतर दुनिया के कई अहम देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क साधा है।

इन बातचीतों के दौरान क्षेत्र में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, संभावित मानवीय संकट और इसके वैश्विक शांति व स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

फ्रांस और जर्मनी के साथ कूटनीतिक संवाद

विदेश मंत्री जयशंकर ने बुधवार को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ फोन पर बातचीत की। उन्होंने इस बातचीत को 'सराहनीय' बताते हुए सोशल मीडिया पर साझा किया कि दोनों देशों ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया है। गौरतलब है कि यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इसके अतिरिक्त, जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडेफुल से भी फोन पर चर्चा की है।

ईरान के साथ सीधी बातचीत

क्षेत्र में बढ़ते संकट को देखते हुए जयशंकर ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ विस्तृत फोन कॉल की। इस उच्च-स्तरीय बातचीत में दोनों नेता मौजूदा हालात पर निरंतर संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं। भारत का यह कदम दिखाता है कि वह क्षेत्र के प्रमुख पक्षों के साथ सीधे संवाद के जरिए तनाव कम करने और अपने हितों की रक्षा करने का प्रयास कर रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चिंता

जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी लंबी चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया की स्थिति का ऊर्जा (Energy) पर पड़ने वाला प्रभाव था। दोनों देशों ने माना कि इस संघर्ष का वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। दक्षिण कोरिया और भारत ने मध्य-पूर्व की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों में आपसी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com