पाकिस्तान में मिला 1200 साल पुराना मंदिर, खैबर पख्तूनख्वा की खुदाई में 8 प्राचीन स्थलों का चला पता
Khyber Pakhtunkhwa Archaeology: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में चल रही पुरातात्विक खुदाई में 8 प्राचीन स्थलों की खोज हुई है। वहीं, स्वात के बारिकोट में 1,200 साल पुराने मंदिर के अवशेष भी मिले।
- Written By: अमन उपाध्याय
पाकिस्तान में मिला 1200 साल पुराना मंदिर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Khyber Pakhtunkhwa Archaeological Excavations: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्वात से तक्षशिला तक चल रही पुरातात्विक खुदाई के दौरान 8 प्राचीन स्थलों का पता चला है। इस खोज को क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस खुदाई का संचालन इटली के पुरातत्वविदों और खैबर पख्तूनख्वा पुरातत्व निदेशालय ने संयुक्त रूप से किया है।
सबसे अहम खोज स्वात जिले के बारिकोट क्षेत्र में हुई है, जहां लगभग 1,200 वर्ष पुराने एक छोटे हिंदू मंदिर के अवशेष मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मंदिर उस दौर की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमाण है जब यह इलाका हिंदू शाही राजवंश के अधीन था।
मंदिर के चारों ओर बफर जोन
इतालवी पुरातत्व मिशन के निदेशक डॉ. लुका ने बताया कि यह खोज बारिकोट या प्राचीन बजीरा क्षेत्र में की गई है। मंदिर के चारों ओर पुरातात्विक परतों की सुरक्षा के लिए एक ‘बफर जोन’ बनाया गया है, जिससे खुदाई क्षेत्र को और विस्तार दिया जा सके। यह क्षेत्र अब स्वात नदी तक बढ़ाया जा रहा है ताकि आसपास की अन्य संभावित संरचनाओं का भी अध्ययन हो सके।
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प्रशिक्षण व रोजगार
यह पूरी खुदाई ‘खैबर पथ परियोजना’ नाम की एक तीन वर्षीय पहल का हिस्सा है। इस परियोजना की शुरुआत 1 जून से हुई थी जिसका उद्देश्य न केवल पुरातत्व बल्कि क्षेत्रीय विकास, कौशल प्रशिक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देना है। इस मिशन के तहत 400 से अधिक स्थानीय श्रमिकों को खुदाई, संरक्षण और विरासत प्रबंधन में प्रशिक्षण व रोजगार दिया जा रहा है।
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प्रारंभिक अध्ययन बताते हैं कि इन स्थलों पर प्रागैतिहासिक काल से लेकर इस्लामी काल तक मानव बस्तियां रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण खोजों में एक किला भी शामिल है, जिसे गजनवी काल का माना जा रहा है।
पुरातात्विक स्थलों की पहचान
इतालवी टीम ने अब तक खैबर पख्तूनख्वा में 50 से अधिक पुरातात्विक स्थलों की पहचान की है। ये खोजें पाषाण युग से लेकर सिकंदर महान के काल, बौद्ध धर्म, हिंदू शाही राजवंश, यूनानी और प्रारंभिक इस्लामी युग तक फैली हुई हैं। यह सब इस क्षेत्र की मानव सभ्यता की निरंतरता और विविधता को दर्शाता है।
