

Pakistan On Indus Water: पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि भारत ने पानी रोक दिया है। भारत का स्पष्ट कहना है कि जब दुश्मन लगातार हमारे यहां खून बहा रहा है, तो हम उसे अपना पानी कैसे देते रहें? लेकिन पाकिस्तान को यह बात समझ नहीं आ रही है। वहां के सेना प्रमुख से लेकर राजनीतिक नेता तक भारत के खिलाफ कड़े बयान दे रहे हैं।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को इस्लामाबाद में कहा, “भारत हमारी एक बूंद पानी भी नहीं छीन सकता।” उन्होंने धमकी देते हुए कहा, “अगर भारत ने ऐसा किया, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा कि वह हमेशा याद रखेगा।”
शहबाज ने यहां तक कहा कि पाकिस्तान की वायुसेना ने पहले भी भारत के छह लड़ाकू विमान गिराए हैं, जिनमें चार राफेल विमान शामिल थे। इस बयान पर पाकिस्तान में भारी उत्साह देखा गया, लेकिन सच तो यह है कि पाकिस्तान ने इस दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत कभी नहीं दिखाया। वहीं भारत ने अपनी कार्रवाई के सबूत स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किए हैं और पाकिस्तान अब तक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की मार का दर्द झेल रहा है।
पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने संधि निलंबन को सिंधु घाटी की सभ्यता और संस्कृति पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने पानी रोक दिया तो पाकिस्तान युद्ध से पीछे नहीं हटेगा। उनके शब्द भावुक थे, लेकिन असल में ये बयान पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति के लिए थे, जहां हर नेता भारत विरोध को अपनी राजनीति की ताकत मानता है।
पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अमेरिका में धमकी दी कि अगर भारत सिंधु नदी पर बांध बनाएगा तो वे उसे उड़ा देंगे। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी भारत की निजी संपत्ति नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि पाकिस्तान परमाणु देश है और अगर उसके अस्तित्व को खतरा हुआ तो वह आधी दुनिया को अपने साथ लेकर डूब सकता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि परमाणु हथियारों की धमकी देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उसके परमाणु नियंत्रण की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी परमाणु दबाव में नहीं आएगा और अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
पाकिस्तान गंभीर जल संकट से गुजर रहा है और उसकी आबादी का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी और उससे जुड़ी नदियों पर निर्भर है। भारत द्वारा पानी की आपूर्ति कम होने से पाकिस्तान की खेती, उद्योग और पीने के पानी की आपूर्ति प्रभावित होगी। इसलिए पाकिस्तान के नेता जल संकट को लेकर काफी चिंतित और तनाव में हैं।