शफीकुर रहमान और तारिक रहमान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Election Result: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबकी नजरें मतगणना और चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। शेख हसीना के शासन के अंत के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है जिससे न केवल ढाका बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
इस बार मुख्य मुकाबला खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि बांग्लादेश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा और उसका नई दिल्ली के प्रति क्या रुख रहेगा?
लंदन में लंबे निर्वासन के बाद लौटे तारिक रहमान फिलहाल प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरे हैं। खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी की कमान संभालते ही उनकी लोकप्रियता में भारी उछाल देखा गया है। भारत के प्रति उनके स्टैंड की बात करें तो उन्होंने ‘समान सम्मान और आपसी हित’ की नीति की वकालत की है।
हालांकि, ऐतिहासिक रूप से बीएनपी का झुकाव चीन और पाकिस्तान की तरफ रहा है लेकिन इस बार तारिक रहमान ने कूटनीतिक संतुलन बनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे तीस्ता जल विवाद और सीमा पर होने वाली मौतों जैसे मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाएंगे और बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देंगे।
जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान इस बार गठबंधन के साथ मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह है कि कट्टरपंथी विचारधारा के लिए जानी जाने वाली इस पार्टी ने इस बार भारत के प्रति काफी नरम और सकारात्मक रुख दिखाकर विशेषज्ञों को चौंका दिया है। शफीकुर रहमान ने भारत को बांग्लादेश का ‘सबसे निकटतम पड़ोसी’ बताते हुए द्विपक्षीय रिश्तों को अपनी प्राथमिकता बताया है। हाल ही में उनकी भारतीय उच्चायुक्त से मुलाकात को उनकी पुरानी ‘भारत विरोधी’ छवि को बदलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
छात्र आंदोलन से उभरे नेता नाहिद इस्लाम और उनकी पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भले ही सीधे दौड़ में न हों लेकिन वे सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, भारत के लिए वे एक चुनौती बन सकते हैं क्योंकि शेख हसीना को शरण देने के मुद्दे पर उनका रुख काफी आक्रामक रहा है। वे भारत के साथ पिछले सभी समझौतों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
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नई दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा को लेकर है। भारत को डर है कि नई सरकार के तहत कहीं उत्तर-पूर्वी भारत के उग्रवादी समूहों को फिर से बांग्लादेश में पनाह न मिल जाए। इसके अलावा, अरबों डॉलर के निवेश वाले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना भी भारत के ‘नेबरहुड फर्स्ट’ विजन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।