बांग्लादेश चुनाव: 'अवामी लीग पर बैन हटाओ...', तसलीमा नसरीन की चेतावनी- जमात-ए-इस्लामी पर कही चौंकाने वाली बात

Bangladesh Elections: बांग्लादेश में चल रहे मतदान के बीच लेखिका तसलीमा ने बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने अवामी लीग पर प्रतिबंध को लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बताते हुए धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व की मांग की।
Bangladesh Elections 2026: "Lift the ban on the Awami League..." Taslima Nasreen warns against Jamaat-e-Islami
तसलीमा नसरीन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में आज, 12 फरवरी 2026 को 299 संसदीय सीटों के लिए आम चुनाव के तहत मतदान प्रक्रिया जारी है। इस ऐतिहासिक चुनावी माहौल के बीच प्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन ने देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। नसरीन का मानना है कि वर्तमान में मुख्यधारा के धर्मनिरपेक्ष दलों पर लगाए गए प्रतिबंधों का फायदा सीधे तौर पर कट्टरपंथी ताकतों को मिल सकता है।

'जमात-ए-इस्लामी' के उभरने का डर

तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) चुनाव जीतती है तो बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार कट्टरपंथी संगठन 'जमात-ए-इस्लामी' मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा केवल इसलिए संभव हो पाएगा क्योंकि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उनके अनुसार, किसी कट्टरपंथी दल का मुख्य विपक्ष बनना लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा।

वंशवादी और धर्म-आधारित राजनीति का विरोध

लेखिका ने अपने बयानों में वंशवादी राजनीति और धर्म पर आधारित राजनीति का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने अंतरिम या आने वाली सरकार से अपील की है कि अवामी लीग पर से प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए। नसरीन का तर्क है कि विपक्ष की भूमिका हमेशा धर्मनिरपेक्ष या वामपंथी दलों के पास होनी चाहिए, न कि किसी धार्मिक कट्टरपंथी दल के पास। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यदि सैद्धांतिक रूप से किसी दल पर प्रतिबंध लगाना ही है तो वह जमात-ए-इस्लामी होना चाहिए न कि कोई धर्मनिरपेक्ष दल।

कैसा हो बांग्लादेश का नया नेतृत्व?

तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश के भविष्य के लिए एक नई दृष्टि पेश की है। उन्होंने कहा कि देश को अब वंशवादियों या धर्मगुरुओं की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, बांग्लादेश को एक ऐसे धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व की जरूरत है जो महिलाओं के अधिकारों, सार्वभौमिक शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हो।

चुनौतियों के बीच मतदान

यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब हिंसा और कट्टरपंथी प्रचार की खबरें भी सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक,  बूथों की लूट और मतदाताओं को धमकाने जैसी धांधली की खबरें भी चुनावी माहौल को गरमा रही हैं। ऐसे अशांत माहौल में तसलीमा नसरीन का धर्मनिरपेक्षता पर जोर देना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

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