नेपाल की राजनीति में महा-भूचाल! बालेन शाह ने बदले 110 कानून, एक झटके में 1594 नियुक्तियां रद्द
Nepal PM Balen Shah: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने एक ऐतिहासिक फैसले में कई सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में की गई 1594 राजनीतिक नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
बालेन शाह, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Nepal PM Balen Shah New Decision: नेपाल की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में रविवार (3 मई 2026) को बड़ा फेरबदल हुआ है। प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए देशभर के विभिन्न संस्थानों में की गई 1500 से अधिक राजनीतिक नियुक्तियों को एक साथ समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कदम को नेपाल के हालिया इतिहास में सबसे बड़े संस्थागत सुधारों में से एक माना जा रहा है।
कैबिनेट बैठक और राष्ट्रपति की मंजूरी
प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने आठ महत्वपूर्ण अध्यादेशों को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के पास भेजा था। इनमें से एक अध्यादेश विशेष रूप से सार्वजनिक निकायों में की गई राजनीतिक नियुक्तियों को समाप्त करने के लिए तैयार किया गया था।
राष्ट्रपति पौडेल के तरफ से इस अध्यादेश पर आदेश मिल जाने के बाद इसे राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया। जिसके बाद करीब 150 सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के 1594 पदाधिकारी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त हो गए।
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पिछली सरकारों की नियुक्तियां निशाने पर
इस बड़े प्रशासनिक बदलाव की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी एक विशेष कार्यकाल की नहीं बल्कि पिछली कई सरकारों के दौरान की गई सभी नियुक्तियों को एक साथ निरस्त कर दिया गया है। चाहे वे नियुक्तियां केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल ‘प्रचण्ड’ या सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय की गई हों, बालेन सरकार ने उन सभी को शून्य घोषित कर दिया है। इस बड़े फैसले के लिए सरकार ने लगभग 110 अलग-अलग कानूनों में संशोधन का रास्ता अपनाया है।
इस फैसले से क्या पड़ेगा असर?
बालेन सरकार के इस आदेश का सबसे बड़ा असर नेपाल के विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य निकायों पर पड़ा है। देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान जैसे पूर्वांचल विश्वविद्यालय, पोखरा विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय, कृषि एवं वन विज्ञान विश्वविद्यालय, और लुम्बिनी विश्वविद्यालय के उपकुलपति (VC), रजिस्ट्रार और अन्य शीर्ष पदाधिकारी हटा दिए गए हैं।
वहीं, स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उथल-पुथल देखी जा रही है। नेपाल मेडिकल काउंसिल, नर्सिंग काउंसिल, स्वास्थ्य अनुसंधान परिषद और चिकित्सा शिक्षा आयोग के पदाधिकारियों के साथ-साथ कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अस्पताल निदेशकों को भी पदमुक्त कर दिया गया है।
दूरसंचार से लेकर पर्यटन तक का बदलाव
केवल शिक्षा और स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण, नागरिक उड्डयन प्राधिकरण, पर्यटन बोर्ड, प्रेस काउंसिल, और कर्मचारी संचय कोष जैसे प्रमुख निकायों में भी बड़े स्तर पर फेरबदल हुआ है। यहां तक कि माओवादी संघर्ष के बाद गठित शांति प्रक्रिया से जुड़े अहम निकाय जैसे सत्य निरूपण आयोग के पदाधिकारी भी इस फैसले की जद में आए हैं।
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जहां एक ओर सरकार इसे देश की जर्जर प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि योग्यता के आधार पर नई नियुक्तियां कर संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ाई जाएगी।
